Wednesday, July 31, 2013

दुआओं का फूल …

इमरोज़ की इक नज़्म का जवाब ….


दुआओं का फूल …

सोचें सच होती होगीं
पर हीर की सोचें कभी कैदो ने
 सच नहीं होने दीं
इक खूबसूरत शायरा की मुहब्बत
वक़्त की कीलियों पर टंगी
मजबूर खड़ी है ….

इस पीर की कसक
तूने भी सुनी होगी कभी
कब्रों पर
सुर्ख गुलाब नहीं खिला करते
अपनी पागल सी चाहत
रंगीली चुन्नियों के ख़्वाब
मैंने अब चुप्पियों की ओट में
छिपा दिए हैं …
मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं …

चल तू यूँ जख्मों पर
रेशमी रुमाल न फेरा कर
रात आहें भरने लगती है
बेजान हुए सोचों के बुत
पास खड़े दरख्तों से
ख़ामोशी के शब्द तलाशते हैं
सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ….

देख आज मेरी नज़्म भी
सहमी सी खड़ी है
आ आज की रात
इसकी छाती पर कोई
दुआओं का फूल रख दे …!!

हीर …

37 comments:

Anupama Tripathi said...

सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ….

दर्द के समुंदर में डूबते हुए शब्द ....
बहुत सुंदर .....!!

कालीपद "प्रसाद" said...

देख आज मेरी नज़्म भी
सहमी सी खड़ी है
आ आज की रात
इसकी छाती पर कोई
दुआओं का फूल रख दे …!!
बहुत सुंदर !
latest post,नेताजी कहीन है।
latest postअनुभूति : वर्षा ऋतु

ANULATA RAJ NAIR said...

नज़्म की छाती पर दुआओं के फूल..
निःशब्द हूँ......

सादर
अनु

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ….

आप दर्द को ही जीती हैं ....

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

बहुत सुंदर रचना

Dr. Shorya said...

बहुत सुंदर रचना , आपको बहुत सारी शुभकामनाये

अनुपमा पाठक said...

दुआओं के फूल जिसे प्राप्त हों वही ऐसी नज़्म लिख सकता है!

विभा रानी श्रीवास्तव said...

सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं
आभार आप का
सादर

अशोक सलूजा said...

हीर का दर्द तो महसूस कर सकता हूँ ...पर बयाँ नही कर सकता ....
शुभकामनायें!

वाणी गीत said...

मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं …
आह !

प्रवीण पाण्डेय said...

सबको नसीब हों, ये फूल दुआओं के।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

भीतर तक उतरते दर्द को समेटे अंतर्मन के भाव.....

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aisee rachnaaon ko padhne par baht kucch seekhne ko milta hai ..badee hee gahan anubhooti ke sath likhee gayee ye rachna ..saadar badhaaayee ke sath

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aisee rachnaaon ko padhne par baht kucch seekhne ko milta hai ..badee hee gahan anubhooti ke sath likhee gayee ye rachna ..saadar badhaaayee ke sath

डॉ टी एस दराल said...

हीर की पीर की कसक को बहुत खूबसूरत लफ़्ज़ों में पिरोया है.

चल तू यूँ जख्मों पर
रेशमी रुमाल न फेरा कर --

बहुत खूब !
बेहतरीन रचना।

ताऊ रामपुरिया said...

चल तू यूँ जख्मों पर
रेशमी रुमाल न फेरा कर
रात आहें भरने लगती है
बेजान हुए सोचों के बुत
पास खड़े दरख्तों से
ख़ामोशी के शब्द तलाशते हैं
सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ….

क्या कहूं? पढते पढते निशब्द हो गया हूं.

लाजवाब.

रामराम.

Maheshwari kaneri said...

लगता है हीर जी आप के रोम रोम में से दर्द बोल उठता है..आप के शब्द शब्द दर्द से भीगा हुआ होता है..

Anju (Anu) Chaudhary said...

दर्द में डूबे शब्दों में भी दुआ सा असर नज़र आता है

बहुत खूब

sushmaa kumarri said...

भावो का सुन्दर समायोजन......

sushmaa kumarri said...

भावो का सुन्दर समायोजन......

Khushdeep Sehgal said...

आपने दुनिया को रूलाने की रस्म निभाई है,
हमने आपको हंसाने की कसम खाई है...


वैसे हंसी का एक्सरे किया जाए तो बड़ा ज़ालिम दर्द सामने आता है...

जय हिंद...

Unknown said...

पास खड़े दरख्तों से
ख़ामोशी के शब्द तलाशते हैं
सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ….

देख आज मेरी नज़्म भी
सहमी सी खड़ी है
आ आज की रात
इसकी छाती पर कोई
दुआओं का फूल रख दे …!!निशब्द करती नज्म

Vandana Ramasingh said...

भावों से भरी रचना

Prakash Jain said...

रंगीली चुन्नियों के ख़्वाब
मैंने अब चुप्पियों की ओट में
छिपा दिए हैं …
मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं …


Aafreen...Nishabd...

सदा said...

दुआ चंदन
बस रहे पावन
जहाँ भी रहे !

वसुन्धरा पाण्डेय said...

सपनों के अक्षर पत्थर हो
धीमे से समंदर में
उतर जाते हैं ...अद्भुत....
निशब्द हूँ .

Ramakant Singh said...

कब्र पर गुलाब प्यार के खिलते है?
कब्र पर गुलाब प्यार के ही चढते हैं
आपका लेखन दिल में उतर जाता है बेहतरीन

Asha Joglekar said...


आप तो साक्षात पीडा खडी कर देती हैं ।

सपनों के अक्षर दर्द के समंदर में उतर जाते हैं
सहमी सी नज्म पर दुआ के फूल रख जाते हैं ।

कविता रावत said...

देख आज मेरी नज़्म भी
सहमी सी खड़ी है
आ आज की रात
इसकी छाती पर कोई
दुआओं का फूल रख दे …!!
.....सच दुआएँ हर स्थिति में काम आती हैं ...

Unknown said...

"चल तू यूँ जख्मों पर
रेशमी रुमाल न फेरा कर
रात आहें भरने लगती है ...."
दर्दे-बयां का उदास चेहरा
सदियों से ज्यूँ रह में निगाहें जड़े बैठा है
कोई नहीं आएगा अब इस तरफ
...फिर भी

खूबसूरत कहते हुए डरती हूँ इसे ....कहीं रुसवाई न हो जाये

Minoo Bhagia said...

मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं … waah harqeerat , bahut din baad padhi tumhari nazm , dil khush ho gaya :)

Reetika said...

tera mera rishta jo ban gaya dard ka..soch ke to dekh kya sirf yahi ek visaal ki wajeh hai..?

Betuke Khyal said...

"मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं "

umdaa hai...

kyun kisi kaatib-e-waqt kee chale hamesha...lagan lagi hai to ab lakeeron ka kya kaam, lakeeren to sarhadon ka kaam karti hain...

पूनम श्रीवास्तव said...

देख आज मेरी नज़्म भी
सहमी सी खड़ी है
आ आज की रात
इसकी छाती पर कोई
दुआओं का फूल रख दे
dard me bhingi huiis najm par
duvaayen ke phool jaraur asar dikhayenge.duvaayen kabhi vyrth nahi jaatin------hrkeerat ji
marm-sparshi nazm---
poonam

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' PBChaturvedi said...

बहुत बढ़िया.. स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

शिवनाथ कुमार said...

मुहब्बत की लकीरें
कैनवास पर उतरती होंगी
हथेलियों पर लकीरें
तिड़क जाती हैं …

बहुत खूब, लाजवाब
साभार!

vijay kumar sappatti said...

कुछ नज्मे बस दिल पर उतर जाती है , ये भी उन्ही में से एक है हरकीरात जी .. बस मन कहीं खो सा गया है ..

दिल से बधाई स्वीकार करे.

विजय कुमार
मेरे कहानी का ब्लॉग है : storiesbyvijay.blogspot.com

मेरी कविताओ का ब्लॉग है : poemsofvijay.blogspot.com