Wednesday, August 2, 2017

ग़ज़ल

ग़ज़ल
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ले गया लूट कर दिल मेरा कौन है
दे गया ग़म नया,  बेवफ़ा कौन है

जात क्या,उम्र क्या, क्या ग़लत क्या सही
इश्क़ में सब भला सोचता कौन है

टूटकर था कभी दिल ने' चाहा जिसे
चल दिए कह यही, तू मेरी कौन है ?

इक मुद्दत बाद देखा अभी आइना
पूछने है लगा,  तू बता कौन है ?

कौन रह रह सदा,दे रहा रात भर
तू नहीं तो भला,  कौन है कौन है

यूँ तो' ग़म के सिवा घर में' कोई नहीं
दास्ताँ सुन मे'री,  रो रहा कौन है

आज भी 'हीर' तुझको न पाई भुला
इश्क़ के दर्द यूँ  , भूलता कौन है

हीर ....

9 comments:

सुशील कुमार जोशी said...

वाह।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (04-08-2017) को "राखी के ये तार" (चर्चा अंक 2686) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ताऊ रामपुरिया said...

वाह, शानदार गजल, बहुत शुभकामनाएं.
रामराम
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Rohitas Ghorela said...

बहुत ही सुंदर गजल
वाह

Asha Joglekar said...

कमाल की गजल ।

हितेष said...

इक मुद्दत बाद देखा अभी आइना
पूछने है लगा, तू बता कौन है ?

क्या बात है हीर जी.. हर एक शेर लाजवाब, बस वाह वाह

हर एक शेर मुक़र्रर.

Book River Press said...

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kya hai kaise said...

बहुत ही खुबसूरत
बहुत उम्दा लिखा है.
Raksha Bandhan Shayari

Unknown said...

यूँ तो' ग़म के सिवा घर में' कोई नहीं
दास्ताँ सुन मे'री, रो रहा कौन है

Bohut khubsurat
Heer ji