Thursday, February 6, 2014

दर्द (क्षणिकाएं )

दर्द    (क्षणिकाएं )

(1)

दर्द  हैरान था
ये किसने आह भरी है
जो मेरी कब्र पर से आज
फिर रेत उड़ी  है  …
(२)
सीने में ये कैसा
फिर इश्क़ सा जला है
कि इस आग की लपल से
आज मेरा दुपट्टा जला है  …
(३)
ख्यालों में
टूटा है कोई धागा
के आज मेरे पैर फिर
दरगाह की ओर बढ़े हैं ....
(४)
उम्र खामोश थी
ये किसने बाँध दिए हैं
मेरे पैरों में दर्द के घुंघरू
कि रात की छाती में
यूँ हूक उठी है  ....
(५)
मुहब्बत हँसने लगी है
दर्द आशिक बना बैठा है
और नामुराद सबा तेरी यादों का
पुलिंदा उड़ा लाई है ....

हीर  …

20 comments:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

दर्द के इतने सारे शेड्स देखकर तो दर्द से मोहब्बत होने लगी है!!
सारी की सारी क्षणिकाएँ दर्द को एक नए सिरे से डिफ़ाइन करती हैं!

सुशील कुमार जोशी said...

सलिल को बोलो
मोहब्बत कर ले !

संजय भास्‍कर said...

सीने में ये कैसा
फिर इश्क़ सा जला है
कि इस आग की लपल से
आज मेरा दुपट्टा जला है
...बेहद दर्द भरी हैं नज्म... रभावशाली पीड़ा शदों में घुल सी गयी है...!!

संजय भास्‍कर said...

गहराई लिये होती हैं आपकी शब्द-संरचना...हरकीरत जी

आग्रह है-- हमारे ब्लॉग पर भी पधारे
शब्दों की मुस्कुराहट पर ....दिल को छूते शब्द छाप छोड़ती गजलें ऐसी ही एक शख्सियत है

वाणी गीत said...

दर्द में आशिकी इतनी !
लाजवाब !

Anupama Tripathi said...

...दर्द की स्याही से भीगी हुई कलम ...
बहुत खूबसूरत लिखा है ...

प्रवीण पाण्डेय said...

हर ओर से दर्द को कुरेदा है, कौन जाने किसके दर्द अधिक है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (08-02-2014) को "विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता" (चर्चा मंच-1517) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अशोक सलूजा said...

फिर वोही दर्द ,वोही तन्हाई
दोनों को इक-दूजे की याद आई ....
दर्द ही दर्दे दिल की दवा है .....
शुभकामनायें!

शिवनाथ कुमार said...

प्रखर प्रेम में दर्द की आह सुनाती क्षणिकाएं !
बेहतरीन, साभार !

Neeraj Neer said...

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं .. दर्द की सुन्दर बयानी

डॉ. मोनिका शर्मा said...

मर्म को छू गयीं पंक्तियाँ

Onkar said...

बहुत खूब

Maheshwari kaneri said...

छू गयीं पंक्तियाँ ...बहुत खूब

Kailash Sharma said...

अंतस को छूती लाज़वाब क्षणिकाएं...

Vaanbhatt said...

गहन अभिव्यक्ति...

Himkar Shyam said...

दर्द को इतनी खूबसूरती से बयां किया जा सकता है.., सोचा न था.. अलग-अलग बिम्ब और प्रतीक.. इस दर्द में एक राग है, सहज प्रवाह है जो सीधे हमारे अंतर्मन को स्पर्श करता है...बकौल ग़ालिब 'दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना..'
इल्तिजा है कि अपनी बेशकीमती रायों से ब्लॉग को नवाजते रहा करें...हौसला अफजाई होगी...

दिगम्बर नासवा said...

दर्द को किस अंदाज़ से बयाँ किया है ... बहुत ही अलग बिम्ब और अलग अभिव्यक्ति ...

संदीप said...



दर्द हैरान था
ये किसने आह भरी है
जो मेरी कब्र पर से आज
फिर रेत उड़ी है …

bahutkhub !

Ranjana verma said...

बहुत खूबसूरत नज्में ...