Sunday, February 13, 2011

मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......

है इश्क़ खुदा , इश्क़ ही रब्ब है , इश्क़ ही शीरी-फरहाद बन जाता
कह दो जो दो लफ्ज़ इश्क़ के , हर ज़ख्म दर्द का खुद सिल जाता

फ़रवरी इश्क़ का दिन है ...मोहब्बत का दिन है ...शीरी का दिन है ...फरहाद का दिन है ...हीर-रांझे का दिन है ...सोहणी - महिवाल का दिन है ......तो आइये इस दिन का जश्न मनाते हैं इस नज़्म के साथ ......
आज की नज़्म इस मोहब्बत के नाम .......


मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......


मैं बीज हूँ मोहब्बत का ....
तू इश्क़ की ज़मीं पे उगा जरा
मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा

मैं सारी हयात तेरे साथ चलूं
तू महबूब मेरा बन तो जरा
मैं ख़त हूँ इक प्यार भरा,मेरी
इक-इक सतर तू पढ़ तो जरा

मैंने गुंध लिया है इसे आटे में
तू कोई रोटी इश्क़ की उतार जरा
बुरकी इश्क़ की मिलकर तोडें
कर अना दिल से हम दूर जरा


मैं चिराग़ हूँ हीर की मज़ार का
परवाना बन तू जल तो जरा
मैं आग हूँ , इक शरमाई हुई ........
तू इस बुत से नकाब उतार जरा ..

मत पढ़ इश्क़ का फतवा जालिम
ये जात खुदा की मान जरा ...
इश्क़ नहीं बसता जिस दिल में
वो हैवान का घर ये मान जरा

मैं चनाब हूँ , मैं रबाब हूँ ...
मैं हुस्नो - इल्म का शबाब हूँ
मैं मुहब्बत का सुर्ख गुलाब हूँ
तू खुश्बुएं लुटा के देख जरा .....

इक ज़ख्म हूँ मैं दर्द भरा ...
तू इश्क़ के धागे से सी जरा
हर दर्द रिस कर बह जायेगा
तू इश्क़ की दवा लगा तो जरा

इक रात हूँ मैं इश्क़ भरी
तू द्वार पे दस्तक दे तो जरा
इस स्याह रात की हथेली पर
कोई रंग हिना का उतार जरा

मैं सोहणी का कच्चा घडा भी हूँ
तू इश्क़ के दरिया में डूब जरा
इस इश्क़ की इबादत को कभी
तू बन के राँझा पढ़ तो जरा

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा

मैं बीज हूँ इक मोहब्बत का
तू इश्क़ की ज़मीं पे उगा जरा
मैं गीत हूँ , तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा .....

82 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

bahut sundar geet hai..

रश्मि प्रभा... said...

मैं सोहणी का कच्चा घडा भी हूँ
तू इश्क़ के दरिया में डूब जरा
इस इश्क़ की इबादत को कभी
तू बन के राँझा पढ़ तो जरा

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा
kuch der tak maine ise gungunane ki koshish ki , sohni ka nasha hai aisa ki puchiye mat...

Saba Akbar said...
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Saba Akbar said...

वाह जी !! क्या बात है...

कोशिश कर रही हूँ गुनगुनाने की ... :)

वन्दना अवस्थी दुबे said...

मैं बीज हूँ मोहब्बत का ....
तू इश्क़ की ज़मीं पे उगा जरा
मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा
क्या बात है हरकीरत जी. बहुत सुन्दर. रश्मि जी की तरह मेरा भी मन हुआ, इसे गुनगुनाने का.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

तू गुनगुना मैं गीत हूँ
मुझे चूम ले तेरा मीत हूँ
..वाह! वाह! तबियत प्रसन्न करने वाले भाव हैं।

amit kumar srivastava said...

yeh ishk kambakht cheez hi aisi hai...bahut sundar.

Sushant Jain said...

heer ji bahut hi sunder prastuti...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

हीर जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति... सामयिक ..वेलेंटाइन दे पर .. उम्दा ... गीत

सोमेश सक्सेना said...

वेलेंटाइन डे के दिन इश्क में पगी आपकी ये नज़्म पढ़कर अच्छा लगा।

डॉ. मोनिका शर्मा said...

प्रेम की सार्थक अभिव्यक्ति..... बहुत सुंदर

Udan Tashtari said...

उम्दा गीत!

विशाल said...

इश्क की फितरत बहुत नाज़ुक है.
आप का गीत भी बहुत ही नाज़ुक है.

इक ज़ख्म हूँ मैं दर्द भरा ...
तू इश्क़ के धागे से सी जरा
हर दर्द रिस कर बह जायेगा
तू इश्क़ की दवा लगा तो जरा

बहुत ही उम्दा.आपकी कलम को ढेरों सलाम.

वाणी गीत said...

मैं ख़त हूँ कोई प्यार भरा एक एक सतर तू पढ़ तो जरा...मैं बीज हूँ मुहब्बत का ...
क्या कहें ...डूब रहे हैं उतर रहे हैं ...
बेहद खूबसूरत गीत ...

मैं गीत कोई गा लेती जो तू गुनगुना जरा लेता
मैं हंस देती खिलखिलाकर जो तू मुस्कुरा जरा लेता ...

OM KASHYAP said...

मैं गीत हूँ , तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा .....
bahut hi sunder bhav

Sunil Kumar said...

मैं बीज हूँ मोहब्बत का ....
तू इश्क़ की ज़मीं पे उगा जरा
मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा
ise kahte prem ki abhivyakti vh bhi prem divas pe badhai

संजय कुमार चौरसिया said...

तू गुनगुना मैं गीत हूँ
मुझे चूम ले तेरा मीत हूँ

yeh ishk kambakht cheez hi aisi hai...bahut sundar.

हीर जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

palash said...

गुनगुनाने को मजबूर करता है आपका गीत\ बहुत सुन्दर

दर्शन कौर धनोय said...

हीर जी ,बहुत खूबसूरती से एक-एक शब्दों को पिरोया हे और इस शब्द रूपी माला के द्वारा आपका हार्दिक स्वागत करती हु ---बधाइयाँ !!!

पटना साहिब की धार्मिक -यात्रा पर आकर इज्जत बक्शे |

Anonymous said...

aapki style se hatkar hai ye nazm heer ji....aur kya khoob hai.....beautiful !
sachmuch geet hai...goonj raha hai ab tak....

मुकेश कुमार सिन्हा said...

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा

itna pyra darshati rachna..:)
happy valentine's day to all!!

deepti sharma said...

bahut hi sunder geet
..

vandan gupta said...

प्रेम दिवस की सुन्दर अभिव्यक्ति………गुनगुनाती हुई……………प्रेम दिवस की शुभकामनाएँ!

Meenu Khare said...

baut sunder geet rachna.

Anonymous said...

bahut hi khoob
taarif k liye shabad kam pad rahe hain
sach main bahut hi shandar likha hain

Ravi Rajbhar said...

Bahut hi pyari geet hai.

badhai.

hamare angan me bhi padhar kar hame kuchh gyan dene ka nek kaz kare. :) :)

sukriya.

Manoj K said...

खूब.. बहुत ही सुन्दर गीत. आज के दिन प्रेम की सम्पूर्ण बात की है आपने. बधाई

केवल राम said...

मैं चनाब हूँ , मैं रबाब हूँ ...
मैं हुस्नो - इल्म का शबाब हूँ
मैं मुहब्बत का इक गुलाब हूँ
तू खुश्बुएं लुटा के देख जरा .....


पर हर कोई इन खुशबूओं को लुटाना नहीं जानता ....मर्मस्पर्शी ...

धीरेन्द्र सिंह said...

इश्क के दिन की एक सटीक रचना। इश्क के इस नज्म में एहसासों की रंगत ने आज के दिन को और खूबसूरत कर दिया। ज़िंदगी की जद्दो ज़हद में दिल के कोमल अहसासों को काग़ज़ पर उतार पाना आसान काम नहीं, इश्क के दिन की आपको शुभकामनाएँ।

सदा said...

मैं बीज हूँ मोहब्बत का ....
तू इश्क़ की ज़मीं पे उगा जरा
मैं गीत हूँ तेरे इश्क़ का ......
तू गुनगुना के मुझे देख जरा

वाह ...लाजवाब कर दिया है आपकी इन पंक्तियों ने इनमें तो वो जादू है जो हर एक को गुनगुनाने पर मजबूर कर रहा है ।

प्रवीण पाण्डेय said...

यह गुनगुनाहट बनी रहे।

Anonymous said...

हीर जी,

मुहब्बत की महक है इस नज़्म में.....इश्क इबादत से कम नहीं है......बहुत ही खूबसूरत नज्म......खुदा आपको मुहब्बत से नवाज़े....आमीन|

shikha varshney said...

हीर जी !
महोहारी गीत जिसे गुनगुनाने को जी चाहे.

दिलबागसिंह विर्क said...

valantaain day par sunder prem geet

Arvind Jangid said...

बहुत ही सुन्दर रचना, आभार.

G.N.SHAW said...

dard bhari geet ...aap ki koyi ek aur kaveeta..chhatisgadh ke kisi patra men chapa tha...dinank..11-02-2011 (bol note karake rakha hun...abhi yaad nahi aa raha hai )..bahut-bahut badhai..aap ko..aur bhi mere post par bhi aane aur utsah badhane ke liye...

vijaymaudgill said...

main geet hu tere ishq ka.....
harkeerat ji bahut hi khoob

परमजीत सिहँ बाली said...

बेहद खूबसूरत गीत ...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर.

रामराम.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...
This comment has been removed by the author.
सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'मैं चिराग हूँ हीर की मज़ार का
परवाना बन तू jala तो जरा
..............................................
मैं सोहणी का कच्चा घड़ा भी हूँ
तू इश्क की दरिया में डूब जरा
आदरणीया हीर जी ,
बहुत सुन्दर रचना , हर बंद मन को मुग्ध करता है |

daanish said...

ਵਾਹ ਜੀ ਵਾਹ !!
ਤੁਸੀਂ ਤੇ ਏਸ ਵਾਰ ਕਮਾਲਾਂ ਹੀ
ਕਿਤਿਯਾੰ ਹੋਯਿਯਾੰ ਨੇ ਜੀ ...
ਲਫਜਾਂ ਨੂੰ ਮੌਕ਼ੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਢਾਲ ਕੇ
ਬੜਾ ਸੋਹਣਾ ਗੀਤ ਲਿਖ ਛੱਡਯਾ ਏ......

राजेश सिंह said...

गाता-गुनगुनाता प्‍यारा नगमा.

Kailash Sharma said...

इक रात हूँ मैं इश्क़ भरी
तू द्वार पे दस्तक दे तो जरा
इस स्याह रात की हथेली पर
कोई रंग हिना का उतार जरा

...दिल कहता है कि यह रचना कभी खत्म न हो और पढते और गुनगुनाते रहो..हरेक पंक्ति मन को छू जाती है. बहुत सुन्दर

पूनम श्रीवास्तव said...

harqirat ji
Wah! kya khoob likha hai aapne ki padhne wale usme duub kar rah jaaye .
nazren hain ki hatna hi nahi chahati aapki pyar bhari nazmon se.
bahut hi behatreen .lazwaab ,
bahut bahut badhai--
इक ज़ख्म हूँ मैं दर्द भरा ...
तू इश्क़ के धागे से सी जरा
हर दर्द रिस कर बह जायेगा
तू इश्क़ की दवा लगा तो जरा poonam

डॉ टी एस दराल said...

इक ज़ख्म हूँ मैं दर्द भरा ...
तू इश्क़ के धागे से सी जरा
हर दर्द रिस कर बह जायेगा
तू इश्क़ की दवा लगा तो जरा


वाह जी वाह , अपने तो हमें एक और रिसर्च का टॉपिक दे दिया ।

बहुत खूबसूरत नज़्म है ।
प्रेमपूर्वक लिखी हुई ।

लेकिन ये दानिश जी क्या कह गए जी पंजाबी में , समझ में नहीं आया ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा

यह नज़्म एहसासों का समुद्र है ....बहुत खूबसूरत

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

`मैं चिराग़ हूँ हीर की मज़ार का
परवाना बन तू जल तो जरा '

रांझा ने यही तो किया था:(

Suman Sinha said...

मैं सारी हयात तेरे साथ चलूं
तू महबूब मेरा बन तो जरा
मैं ख़त हूँ इक प्यार भरा,मेरी
इक-इक सतर तू पढ़ तो जरा
mashallah

हरकीरत ' हीर' said...

आप सभी से क्षमा चाहते हुए .....
आज मन बहुत ही उदास है .....
इतनी टिप्पणियों में से मैं
किसी के भी ब्लॉग पे नहीं जा सकी
शायद इस स्थिति से निकलने में थोडा वक़्त लगे ....
तब तक के लिए ...हीर आपके ब्लॉग पे न आ पाए
तो बुरा न माने ....

सगेबोब जी से निवेदन है दानिश जी की टिपण्णी का
अनुवाद दराल जी को बता दें .....

Kunwar Kusumesh said...

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा

हीर जी,
ये valentine day पर विशेष प्रस्तुति लग रही है.

बस्तर की अभिव्यक्ति जैसे कोई झरना said...

उदासी के ये बादल अपने भीतर दर्द की बेशुमार ख़ुश्बू समाये हुए इस नील गगन में उड़ते-उड़ते कहाँ नहीं पहुँच रहे हैं .....आपकी इस उदासी को आदाब ज़ो इतनी बेहतरीन नज्मों से दुनिया को नवाज़ रही है .....आपकी मोहब्बत के सैलाब को आदाब ज़ो हर किसी को डूब जाने को मजबूर कर देती है ..........आपके इश्क की गहराई को आदाब जिसे नाप सकना हर किसी के बस की बात नहीं ......
हीर जी ! आपके श्री चरणों में आदाब के पहाड़ अर्पित करने को जी कर रहा है ....आदाब ! ! ! ! ! ! !

बस्तर की अभिव्यक्ति जैसे कोई झरना said...

उदासी के ये बादल अपने भीतर दर्द की बेशुमार ख़ुश्बू समाये हुए इस नील गगन में उड़ते-उड़ते कहाँ नहीं पहुँच रहे हैं .....आपकी इस उदासी को आदाब ज़ो इतनी बेहतरीन नज्मों से दुनिया को नवाज़ रही है .....आपकी मोहब्बत के सैलाब को आदाब ज़ो हर किसी को डूब जाने को मजबूर कर देती है ..........आपके इश्क की गहराई को आदाब जिसे नाप सकना हर किसी के बस की बात नहीं ......
हीर जी ! आपके श्री चरणों में आदाब के पहाड़ अर्पित करने को जी कर रहा है ....आदाब ! ! ! ! ! ! !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया हीर जी
स आदर स स्नेह अभिवादन !

आज ( यानी कल 14 फरवरी को ) सवेरे नज़्म पढ़ कर गया था तो रस परिवर्तन पा'कर बहुत ख़ुशी हुई थी…
गुनगुनाने की भी कोशिश की थी …
गा नहीं पाया …
कम्बख़्त गला ख़राब था , पिछली रात एक विवाह भोज में आइसक्रीम के चार चार प्याले गटक गया था इस कारण …

अब आपकी इजाज़त ले'कर गाऊंगा :)

इश्क़ नहीं बसता जिस दिल में
वो हैवान का घर ये मान जरा

क्या बात कही है ! आपका अंदाज़ चुराऊं तो कहूं ओये होए ! क्या बात है ! छा गए जी !

… लेकिन शाम के बाद … ???

# सावधान !
दराल साहब , दानिश जी के नेतृत्व में पूरा ब्लॉगजगत आपके घर के आगे भूख हड़ताल कर देगा … अगर आपने उदासी को तुरंत दुश्मनों के घर दफ़ा नहीं किया तो … :)

♥ प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !
♥ प्रणय दिवस मंगलमय हो ! :)

बसंत ॠतु की भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Avinash Chandra said...

बहुत ख़ूबसूरत है ये मिठास, बनी रहे हमेशा।

Suman said...

harkirat ji, kaya kahun mast lajavab geet hai. muhabbat ka beej ishk ki jamin me hi panapta hai.....

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

मैं महक भी हूँ ,मैं आब भी हूँ
मैं नींद तेरी का ख्वाब भी हूँ
मेरे लब पे रख के लब कभी
तू जाम इश्क़ का उतार जरा

प्यार की खुशबू बिखेरती सुन्दर सी प्यारी नज़्म !

नीरज गोस्वामी said...

मैंने गुंध लिया है इसे आटे में
तू कोई रोटी इश्क़ की उतार जरा
आ बुरकी इश्क़ की मिलकर तोडें
कर अना दिल से हम दूर जरा

उफ्फ्फ....क्या लिखती हैं आप...आफरीन...आफरीन...

नीरज

Satish Saxena said...

बहुत मधुर बहुत प्यारा गीत ...
शुभकामनायें आपको !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

आद. हीर जी,
सादर अभिवादन
कुछ अंतराल बाद आया और इस बासंती नज़्म से मुलाक़ात हुई... क्या कहने...

"सुरमई सी ताव है, इस इश्क के अलाव में
बस बह चला निर्द्वंद सा ही, भाव के बहाव में"

बसंत ऋतु की शुभकामनाये... सादर...

विशाल said...

आदरणीय दराल जी, नमस्कार.
इस से पहले कि दानिश जी की गयी टिप्पणी को आप भूल जाएँ उसका हिंदी अनुवाद हाज़िर है.
दानिश जी ने लिखा है"वाह जी वाह,आपने तो इस बार कमाल ही कर दिया है.लफ़्ज़ों को मौके के मुताबिक ढाल कर बहुत सुन्दर गीत लिख छोड़ा है."

हीरजी,शुक्रिया ,आपने बन्दे को इस काबिल समझा देरी के लिए मुआफी चाहूंगा..

डॉ टी एस दराल said...

शुक्रिया ज़नाब ।
दानिश जी को गुरमुखी में पहली बार पढ़ा था ।
हीर जी तो हमेशा ही कमाल करती हैं ।

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

उफ़....मैं गम हो रहा हूँ....इस कविता में... क्यूंकि यह कविता नहीं....इश्क है...और जिससे मुझे सदा से ही इश्क है....ओ रे...कोई मुझे आ के संभालो....हरकीरत जी मुझे बचा लो..!!

Asha Joglekar said...

इतने दिनों बाद वापिस ब्लॉग जगत पर आई तो आपकी इस नज्म से परिचय हुआ ।
मौका हो दस्तूर हो और हीर जी की कलम हो और गीत मुहब्बत का हो तो कोई कैसे न कायल हो जाये ।
मै चनाब हूँ, मै रबाब हूँ
मैं हुस्नो - इल्म का शबाब हूँ
मैं मुहब्बत का सुर्ख गुलाब हूँ
तू खुश्बुएं लुटा के देख जरा .....
बेहद सुंदर ।

हरकीरत ' हीर' said...

थपेड़ा जी यूँ थपेड़े न खाइए
जरा खुद को भी तो संभालिये
गर इश्क से इश्क है आपको
तो इसमें डूबने से न घबराइए

संजय भास्‍कर said...

आदरणीय हीर जी,
नमस्कार !
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
प्यार की खुशबू बिखेरती सुन्दर सी प्यारी नज़्म !

संजय भास्‍कर said...

प्रेमदिवस की शुभकामनाये !
कई दिनों से बाहर होने की वजह से ब्लॉग पर नहीं आ सका
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

सु-मन (Suman Kapoor) said...

bahut hi sundar heer ji...

सहज साहित्य said...

हरकीरत जी , आपकी शायरी बहुत अलग है -जिसकी शुरुआत तो इस दुनिया से होती है परन्तु इसका सिरा किसी दूसरी दुनिया से जा मिलता है ;लगता है पाठक भी उसी में विलीन हो गया है । कविता की यह ऊँचाई और उदात्तता शब्दों को गरिमा प्रदान करती है ।

डॉ .अनुराग said...

मैंने गुंध लिया है इसे आटे में
तू कोई रोटी इश्क़ की उतार जरा
आ बुरकी इश्क़ की मिलकर तोडें

taking these lines ....

डॉ .अनुराग said...

इश्क बड़ी अजीब शै है .....परवीन शाकिर लिखती है

बस इक निगाह की थी उसने
सारा चेहरा निखर गया है

sagar siddiqui said....

रूदाद -ए - मुहब्बत क्या कहिये कुछ याद रही कुछ भूल गए
दो दिन की मसररत क्या कहिये कुछ याद रही कुछ भूल गए



and our faiz sahab......

kabhii kabhii yaad me.n ubharate hai.n naqsh-e-maazii miTe miTe se
vo aazamaa_ish sii dil-o-nazar kii, vo qurabate.n sii vo faasale se

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

ऐसे गीत को कौन न गुनगुनाना चाहेगा।

बधाई।

---------
ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

राजेश सिंह said...

मीठी और सुरीली सदाएं.

k.joglekar said...

bahut sunadar.

k.joglekar said...

bhai wah......

k.joglekar said...

bhai wah

k.joglekar said...

bahut khoob.

k.joglekar said...

bahut khoob.

k.joglekar said...

kisi galati se ye messege char baar chala gaya hai. sorry.

vijay kumar sappatti said...

harkirat , bahut der se is nazm par hoon .. kya kahun , this is one of your best nazms...

dil me dard ka ahsaas utaarti hui nazm.. aapki lekhni ko salaam.

----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय

vijay kumar sappatti said...

in fact , ishq par isse behatar kuch ho bhi nahi sakta tha

badhayi

Naveen Mani Tripathi said...

मैं आग हूँ , इक शरमाई हुई ........
तू इस बुत से नकाब उतार जरा ..
wah kya khoob likha hai apne ........bilkul sajeev chitran..der hui hai mujhe apke blog tk pahuchane me...sadar abhar Heer ji