Tuesday, September 22, 2009

जब दर्द पास आ मुस्कुराने लगता है ...

सुना है तेरे यहाँ कलम कभी घुटती नहीं .....बड़ी ही रंगीन नज्में हैं तेरे सफ़्हों में .....कभी मुझे भी अपने घर बुलाना ज़िन्दगी ......

सितारों के
टूटने के बाद
रात के अंधेरे में
जब र्द पास आ
मुस्कुराने लगता है
तब दिल के किसी गोशे में
खिल उठते हैं
कई सुर्ख गुलाब ....
एक हलकी सी सुगंध
महक उठती है
हम दोनों के बीच .....

वह मेरा हाथ ...
अपने हाथों में लेकर
तकता है आंखों में
और आँखें ...
खामोशी में भी
कर डालतीं हैं उससे
कई सारे सवालात ....

तभी ....
कोरों में उभर आई
कुछ शबनम की बूंदों पर
वह झुककर ...
रख देता है
अपने तप्त होंठ
और धीमें से कहता है
मैं हूँ न तेरे पास ...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

72 comments:

राज भाटिय़ा said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!
बहुत ही सुंदर कविता कही आप ने
धन्यवाद

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

बहुत खूब... दिल में एक सिहरन सी उठ गयी

विपिन बिहारी गोयल said...

बस एक ख्वाब है ये हकीकत नहीं.बहुत सुंदर

Mrs. Asha Joglekar said...

Dard ke aagosh men sans leti ye muhabbat dil ko kitana sukoon pahunchatee hai. A moment of love is enough to overcome a shower of troubles

शरद कोकास said...

मै हूँ न तेरे पास यह अहसास ही कितना सुखद है

बि. जे. बान्तवा / भोजपुर said...

It's beutiful poems Harkirat jee, Ireally like it.

ANAAM. JASWINDER (001-514-447-1562) said...

ਲਾਜਬਾਬ
ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸਤਾਦ ਧਾਰਨ ਨੂੰ ਦਿਲ ਕਰਦਾ

श्रीश प्रखर said...

ओह, कितना जीवंत लिख जाती हैं आप, आपकी लेखिनी यूँ ही युवा बनी रहे..........

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

सुन्दर विवेचना है।
सीधे मन पर चोट करती है।
बधाई!

Udan Tashtari said...

कहीं कुछ थिरकन हुई...कहीं कुछ सिरहन हुई/// न जाने क्या बात है इस नज़्म मे...कहीं कुछ ...जाने क्या बात है कि शबद देने को मन नहीं.जबकि शब्दकोष ऐसा भी कंगाल नहीं.



बहुत खूब!!


आप भरिये न खाली स्थान!!

जितेन्द़ भगत said...

सजीव कवि‍ता जो अपना-सा लगता है।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर नज्म. शुभकामनाएं.

रामराम.

Mithilesh dubey said...

बहुत ही सुन्दर व लाजवाब रचना। बहुत-बहुत बधाई........

आनन्द वर्धन ओझा said...

हर किरात जी,
मन में उठने वाले कोमल विचारों, दिमाग में उपजनेवाले तूफानों और जेहन के अन्तंग प्रसगों को जिस करीने से आप ज़ुबान देती हैं कि बस पढ़नेवाले हैरत में पड़े रह जाते हैं; आपके इन शब्दों पर 'आह' कहूँ या 'उफ़' कहूँ या 'वाह-वाह' कहूँ... सच में मुश्किल में हूँ :
मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

इतना कह सकता हूँ कि--
''इस कलम ने उन्हें विषबुझी नोक दी है,
अभावों ने भावों के जिगर में छुरी भोंक दी है !!''
साभिवादन... आ.

neera said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में

बहूत खूब!

sada said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

बहुत ही सुन्‍दर कविता बधाई

Pankaj Mishra said...

बहुत खूब !!

सुलभ सतरंगी said...

कई सितारों के
टूटने के बाद
रात के अंधेरे में
जब दर्द पास आ
मुस्कुराने लगता है
तब दिल के किसी गोशे में
खिल उठाते हैं
कई सुर्ख गुलाब ....

हाँ, अहसास ऐसे ही फलक पर आते रहते हैं.

Murari Pareek said...

वाह !! अति सुन्दर !! यही में कहता हूँ तारा से में हूँ न तेरे साथ !!

ankit said...

तभी ....
कोरों में उभर आई
कुछ शबनम की बूंदों पर
वह झुककर ...
रख देता है
अपने तप्त होंठ
और धीमें से कहता है
मैं हूँ न तेरे पास . bahut badiya

विजयप्रकाश said...

हरकीरत जी,
सच आपकी कविता पढ़ किसी और ही जहां में पहुंच गया
धन्यवाद

मानव मेहता said...

bahut khoob.... dil me dabi hui ik yaad ubhar kar saamne aa gaye...
dhanywaad

रश्मि प्रभा... said...

kuch pal ki saansen,dard ke aagosh me........bahut sundar

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह! अहसास कितनी शिद्दत से मुखर होते हैं आपकी रचनाओं में.

अनिल कान्त : said...

एक एहसास ही तो है जो कभी कभी जिंदगी चलाये रखता है

वन्दना said...

mohabbat aur dard ka rishta hai hi kuch aisa.........ek ke bina dooja dhura hai...........behtreen ahsaason se saji kavita.
pls visit my new blog also:
http://ekprayas-vandana.blogspot.com
http://vandana-zindagi.blogspot.com
http://redrose-vandana.blogspot.com

अमिताभ श्रीवास्तव said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!
waaah
prem dard ke bina lagtaa hi nahi ki vo prem he.../dono ka apas me kesa roshtaa he/ jese gulab aour kaanto ka/
aapki rachna ko padhhna aour fir shbdo ke artho ke saath ekaakaar hona..sachmuch mohit kar deta he/

अमिताभ श्रीवास्तव said...

roshta ki jagah "rishta" padhhiye ji

RAJESHWAR VASHISTHA said...

दिल को छू लेने वाली रचना....

mark rai said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में ...
सुन्दर विवेचना है।
बधाई!

Acharya Kishore Ji said...

bahut hi sundar....... dil ko chhu gayi aapki kavita

योगेश स्वप्न said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

komal bhavnaaon ki sunder abhivyakti, badhaai.

समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...

बहुत बेहतरीन रचना .

Manoj Bharti said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

मोहब्बत दर्द के आगोश में ही
पल-पल साँस लेने को अभिशप्त क्यों है ?
हरकिरत जी कभी इस पर भी अपनी कलम की रोशनाई डालिए !!!

सुंदर रचना प्रस्तुत करने के लिए शुक्रिया... वाहे गुरु जी दी मेहर तुहाडे उते हमेशा बनी रवे ।

Apoorv said...

बूंद-बूंद टपकते शहद की तरह चाट गया यह खूबसूरत नज़्म...बाहर के खुशगवार नज़ारों के साथ दिल के अंदर के वातावरण का खूबसूरत तादात्म्य बिठाया है आपने..ऐसे सुखद संयोग मे ही तो खिलते हैं सबसे कोमल अहसास..और महकती है कोई खूशबूदार नज़्म..बधाई.

creativekona said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में ...

Bahut sundar panktiyan---
Hemant Kumar

सर्वत एम० said...

दर्द से प्यार / दर्द से रिश्ता / दर्द ही सब कुछ / सिवा उसके कुछ भी नहीं........पूरी कविता की जान हैं ये शब्द...मैं हूँ न तुम्हारे पास....और मैं, निःशब्द हूँ. अरे हाँ, ईद मुबारक.

वाणी गीत said...

दिल के किसी गोशे में खिल उठाते हैं कई सुर्ख गुलाब..आँखें करती हैं सवालात ...और फिर यह एहसास की कोई हर पल साथ है ... कोमल शीतल मधुर रचना ..!!

Nirmla Kapila said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!
लाजवाब हरकीरत जी दोल के सब से आखिरी छोर से निकलती है आपकी रचनायें बहुत सुन्दर शुभकामनाये

Mumukshh Ki Rachanain said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

अपरिपक्व, एकतरफा प्रेम की शायद यही नियति है जो लोगों को दिखाई देती है, पर प्रेम के दीवानों को तो उस दर्द में भी सुखद अनुभूति ही होती है.

आपकी रचना हमेशा की तरह गहरे भाव लिए बहुत ही सुन्दर बन पड़ी है.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

नीरज गोस्वामी said...

आपकी नज़्म की तारीफ़ के लिए मेरे पास लफ्ज़ हमेशा या तो कम पड़ जाते हैं या फिर मिलते ही नहीं... आप दिल से लिखती हैं बल्कि दिल की असीम गहराईयों से लिखती हैं...जिसे पढ़ कर दिल से वाह निकलती है...
नीरज

Baljeet Pal Singh said...

Aap ka dard ka nagma ham sabka nagma hai.Yeh jindgi kab ek jang jaisi ho jayegi socha na tha.

ज्योति सिंह said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!
title ke saath saath rachana bhi shaandar .aap ko to main kuchh kahne layak hi nahi .

Einstein said...

मैं हूँ न तेरे पास ...
इस पंक्ति को पढ़ते हुए अजीब एहसास हुआ...शब्द इसे व्यक्त नहीं कर पायेगा
सो इसके सहारे मौन कि गहराई में डूब गया हूँ .....

बेहतरीन रचना के लिए आपका आभार ....

Balvinder Singh said...

Ankh ki koron mein shabnam kee boondein. Wah kya bat hai. Too good Harkirat Ji. My compliments

डॉ .अनुराग said...

दर्द ओर आपकी नज़्म .इनमे कुछ रिश्ता जरूर है

सुशील कुमार छौक्कर said...

"जब दर्द पास आ मुस्कराने लगता है" रचना का ये टाईटल सबसे पहले पसंद आया। सच मोहब्बत और दर्द एक दूसरे से जुड़े होते है। और किस खूबसूरती से दोनो को बयान किया आपने। वाकई पढने के बाद काफी देर तक उसका असर रहता है। और शब्द तैरते रहते है।
और धीमें से कहता है
मैं हूँ न तेरे पास ...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

कमाल का लेखन।

Harkirat Haqeer said...

इस बार मैं सभी से मुआफी चाहती हूँ .....आप सभी को पता होगा हमारे जांबाज़ ब्लोगर...देश के रक्षक गौतम राजरिशी ...सीमा पर आतंकवादियों से लड्ते घायल हो गए हैं ...उनके हाथ और पैर में गोली लगी है ....आइये उनके लिए दुआ करें कि वो जल्द ठीक हो जायें ......!!

M VERMA said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!
मोहब्बत दर्द के आगोश मे वज़ूद पाने के लिये अभिशप्त है शायद.
ज़ज्ब ए एहसास है आपकी यह रचना.
अस्तित्व को छूकर गुजरती है

कुलवंत हैप्पी said...

राजऋषि के स्वस्थ होने के लिए दुआ भी। और आपकी इस शानदार कविता के लिए आपको बधाई भी।

Udan Tashtari said...

जब दर्द पास आ
मुस्कुराने लगता है
तब दिल के किसी गोशे में
खिल उठाते हैं
कई सुर्ख गुलाब ....


-अहसासों को बहुत सुन्दरता से शब्द दिये हैं. हमेशा की तरह बहुत उम्दा रचना. बधाई.

मुकेश कुमार तिवारी said...

हरकीरत जी,

यह आपकी ही जादूगिरी है कि शब्द जब कविता में गूंथे जाने लगते हैं तो महकने लगते हैं।

खूबसूरत जज्बात भरी कविता।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

दिगम्बर नासवा said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में ....

खूबसूरत ख्वाब आपकी कलम पा कर सांस लेने लगा है ............ आपकी रचना पढ़ कर मन उड़ने लगता है मुक्त गगन में ...... अनजानी राह की और .......... बहूत ही लाजवाब लिखा है .........

मीनू खरे said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

कितना जीवंत !!!! कमाल का लेखन।

शोभना चौरे said...

एक हलकी सी सुगंध
महक उठती है
हम दोनों के बीच ...
bahut kuch kah gai ye panktiya .
sudar abhivykti.

Dr. Smt. ajit gupta said...

बेहद सुंदर कविता, आपको ढेर सारी बधाई। ऐसा ही लिखती रहें और हम पढते रहें।

Devendra said...

बहुत मासूम नज़्म है। पहले पैरा की वर्तनी में सुधार कर लें-
--दिल के किसी गोशे में
खिल उठते हैं
कई सुर्ख गुलाब।

ताऊ रामपुरिया said...

इष्टमित्रों और परिवार सहित आपको, दशहरे की घणी रामराम.

रामराम.

Suman said...

बेहद सुंदर कविता, आपको ढेर सारी बधाई

MUFLIS said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

waah !!
bahut khoobsurat paloN ko smete hue bahut hi sundar nazm....
ek sher yad a rahaa hai . .
"zindgi bhr zindgi
hm se rahi na-aashnaa ,
zindgi ki aas meiN
hm ne guzaari zindgi..."

khair ,,,
phir se ek bahuit achhee nazm
phir se tareef ke liye
lafzoN ki kamee...

---MUFLIS---

महफूज़ अली said...

तभी ....
कोरों में उभर आई
कुछ शबनम की बूंदों पर
वह झुककर ...
रख देता है
अपने तप्त होंठ
और धीमें से कहता है
मैं हूँ न तेरे पास ...


yeh line bahut achchi lagi/................. haan! main hoon na tere paas............ kisi ka aisa kah dena hi bahut bada sambal hota hai......

महफूज़ अली said...

aapse maafi chahta hoon......... deri se aane ke liye.........



Sorry once again..........



regards
\
\\\\



mahfooz

manu said...

अभी नज्म पढने नहीं..
ये कहने आया हूँ के अपना शेरे-बब्बर ठीक है...
डोंट वरी मैडम जी..

दर्पण साह "दर्शन" said...

wah harkirit ji behterin kavita !!

sada ki bhanti...

"वह मेरा हाथ ...
अपने हाथों में लेकर
तकता है आंखों में
और आँखें ...
खामोशी में भी
कर डालतीं हैं उससे
कई सारे सवालात ...."

Vijay Kumar Sappatti said...

मोहब्बत जैसे .....
कुछ पल के लिए ही सही
साँस लेने लगती है
दर्द के आगोश में .....!!

bahut dino ke baad aapki is nazm ko padhkar aapki kalam ko salaam karne ka dil chahta hai ..

just keep it up . is baar to shabdo ne jaadu sa kiya hai ..

badhai

Vidhu said...

हर कीरतजी कैसी हें ,आज अभी आपके शब्दों को लहरों की तरह बहते देखा ...बस दिन अच्छा बीतेगा यकीन है बधाई....कभी मुझे भी अपने घर बुलाना ज़िन्दगी ....

"लोकेन्द्र" said...

एहसास के समंदर से पुनः एक सुन्दर कृति की प्राप्ति हुई......

प्रकाश बादल said...

फिर से एक भावपूर्ण और शिल्प में बुनी हुई कविता ! बधाई !

NISHEETH KAVI said...
This comment has been removed by the author.
NISHEETH KAVI said...

Mohabbat ek aisa ehsas hai jiske bina vyakti samvedna shunya hota hai.
Vastav men bahut achchhe dhang se kaha gaya hai.Main ismen apni char panktiyan dena chahunga-
Dristi to dristi hai phir thahar jayegi.
Gandh hai to hawa men bikhar jayegi.
Dil lagakarke to dekhiye doston,
Jindgi aap ki bhi sanwar jayegi.
-Umeshwar Dutt"Nisheeth"

kumar zahid said...

dhai jodiyan hai jo zinda raheingi adeebo ke beech
sahir_amrita_imroz
krishnachander_salma
aapko milne wali dad iski gawah hain...hamein zindabad hone ka ahsas dilati rahein..
Kumar Zahid
http://kumarzahid.blogspot.com

Ashwini Kumar said...

aisi samvedansheelta ki wajah se hum aap ki kavitaon ke mureed ho gaye hain..