Friday, July 24, 2009

जो देते हैं दर्द उन गमों से क्या सिला रखना...............................................

इन दिनों वक्त कुछ की कमी सी है ....तो अपनी पुरानी डायरी में से ही एक नज़्म ...शायद ९८ के आस - पास लिखी गई ....



जो देते हैं दर्द उन ग़मों से क्या सिला रखना
बहा दो अश्कों से उन्हें दिल में दबा रखना

वो भला क्या समझेंगे मोहब्बत की बातें
जिनकी है अदा हर दिल को ख़फा रखना

बेच दी हो जिसने गैरत भी अपनी
क्या उनके लिए दिल में गिला रखना

चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना

44 comments:

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना

बहुत सुन्दर | कविता की हरेक पंगती लाजवाब है |

mehek said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना
waah bahut hi lajawab,man kuch mayus sa ho raha tha,ye aakhari sher padhkar dil khil gaya,shukran

अमिताभ श्रीवास्तव said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना
आप लाज़वाब लिखती हैं। बस पढते रहें, मन यही चाहता है।

शरद कोकास said...

वक़्त की कमी है तो इस कमी पर ही गज़ल कहिये ..शायर को हर हाल मे कहना चाहिये ,मेरी शुभकामनायें

M VERMA said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना
==
बहुत सुन्दर
भावपूर्ण

अजित वडनेरकर said...

बहुत खूब....

Mumukshh Ki Rachanain said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

बेहतरीन पंक्तियाँ.

बधाई.

विवेक सिंह said...

दर्द टपकता जा रहा है !

Arvind Mishra said...

खूबसूरत आपटीमिजम

आनन्द वर्धन ओझा said...

'जरुरी है हर जख्म को खुला रखना...' ये एहतियात जरूरी था इस बहार के लिए. सुभान अल्लाह ! ग़ज़ल में ये शेर गज़ब का गिरा है. पुराने चावल पकते और परोसे जाते है तो सर्वत्र अपनी सुगंध बिखेर देते हैं ! बधाई !!

raj said...

बहा दो अश्कों से न उन्हें दिल में दबा रखना

dil ka gamo se rishta kya...ishq ka hasil aansu kyun?....boht khoobsurati se dil ki baat kahi aapne.....

सैयद | Syed said...

बेच दी हो जिसने गैरत भी अपनी
क्या उनके लिए दिल में गिला रखना


...वाह बहुत खूब...

अनिल कान्त : said...

लाजवाब है जी लाजवाब

रंजन said...

बहुत गहराई है.. बहुत खुब..

sada said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

बहुत ही बेहतरीन लिखा है, आभार्

"अर्श" said...

AA CHALEN DIL KO BAHLAANE....

IN PANKTION ME AAPNE JIS TARAH SE DARD KO UKERAA HAI .... LAGTAA HAI MAHFOOJ RAKHAA THA AAJTAK KE LIYE... BAHOT KHUBSURAT NAZM.... SACH KAHTA HUN AAP NAZMO KI RAANI HAI .... BAHOT BAHOT BADHAAYEE


ARSH

ओम आर्य said...

वक़्त की कमी हो जाये, कोई बात नहीं
एहसास जिन्दा है, काफी है मेरे लिए!

ओम...

गौतम राजरिशी said...

"आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना"

चलिये, यही सवाल आपके पाठक आप से कराते हैं?

ब्लौग का नया टेम्पलेट खूब फ़ब रहा है...

रश्मि प्रभा... said...

बेच दी हो जिसने गैरत भी अपनी
क्या उनके लिए दिल में गिला रखना....bahut sahi,shaandaar

दिगम्बर नासवा said...

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना

लाजवाब ग़ज़ल है ........... खिलता हुवा है हर शेर......... आपका लिखा पढ़ना अच्छा लगता है

Murari Pareek said...

वाह इतनी सुन्दर रचना की रोमांचित हो गया खुद बी खुद रोम खड़े हो गए ! हर एक अल्फाज ख़ास अति अति सुन्दर !!

‘नज़र’ said...

बहुत शानदार रचना है!
----
1. विज्ञान । HASH OUT SCIENCE
2. चाँद, बादल और शाम

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अच्छा है कि वक्त की कमी है, कम से कम कुछ पुरानी उम्दा रचनायें जो अब तक बन्द थीं डायरी में अब बाहर आयेंगीं.

Science Bloggers Association said...

दर्द को बखूबी बयां किया है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

एक पुराना सा म्यूजियम said...

उम्मीद है ये वक्त की कमी और भी कुछ शानदार चीजें सामने लाने में मदद करेगी

रंजना [रंजू भाटिया] said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

बेहतरीन बहुत खूब ...

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर ग़ज़ल के लिए धन्यवाद.

संजीव गौतम said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना
शानदार हरकीरत जी. बहुत अच्छी है.
आज अर्बाबे क़लम में आपकी पुस्तक की समीक्षा और एक रचना पढी दोनों के लिये ढेरों बधाईयां

शोभना चौरे said...

बेच दी हो जिसने गैरत भी अपनी
क्या उनके लिए दिल में गिला रखना
lajvab .nishabd

नीरज कुमार said...

Bahut hi achchi Gazal...dard ka saagar chhalak raha hai

MUFLIS said...

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना

waah ! waah !!
itni pyaari ghazal
aur itna asardaar sher !!
badhaaee svikaareiN.

---MUFLIS---

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत उम्दा खयालात हैं.

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र said...

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना


बेहतरीन पंक्तियाँ.

manu said...

क्या बात है..
तो पहले आप गजल लिखते थे जी..?
आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना
बहुत गहरा लगा.....

मिल जायेंगे इस जहाँ में सैंकडों हमसफ़र
प्यार के फूल 'हक़ीर' दिल में खिला रखना
सुंदर मक्ता....

रचना गौड़ ’भारती’ said...

शानदार नज़्म
मेरे ब्लोग को देखें
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका के लिए नज़्म भेजें। अगला अंक दिवाली से संबंधित होगा ।
पत्रिका ज़िन्दगी लाईव मेरे ब्लोग पर मिल जाएगी

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Pankaj Upadhyay said...

wah wah.... purani hai phir bhi utni hi katilana... :)

zindagi ki kalam se! said...

वो भला क्या समझेंगे मोहब्बत की बातें
जिनकी है अदा हर दिल को ख़फा रखना

kya baat hai..wah !

Mrs. Asha Joglekar said...

wah aapki puranee diary ke panne bahut khoobsurat hain.

"लोकेन्द्र" said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने

वैसे भी मुझे आपकी लेखनी पर कुछ कहने से पूर्व ही दिमाग शून्य में चला जाता है.....
ख़ूबसूरत लिखा है आपने.....

Reetika said...

jo dete hain dard un gamo se kya sila rakhna...

par kya hum wakai yeh kar paane mein saksham hain .. shayad nahi... ya hum jaan bhoojh un palo ko bhoolna nahi chahte ?

gs panesar said...

आ चल चलें कहीं दिल को बहलाने
जरुरी है हर ज़ख्म को खुला रखना

......zindgi sirf dard hi nahi balke kuchh aur bhi hai.....
......bahut khoob ...

ritu raj said...

"kya shiqawa rakhna kya gilaa rakhna." harqeerat ji mujhe yah rachna bahut pasand aai. "jaroori hai har zakhm ko khula rakhna..".
Laazabaab.

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