१६ जून २०१३ को उत्तराखंड में भारी बारिश से आई तबाही पर
कुछ हाइकु ....
महाकाल के
आगोश में समाया
उत्तराखंड
(२)
फटा बादल
उमड़ा यूँ सैलाब
आया प्रलय
(३)
कुदरत ने
कहर बरपाया
मची तबाही
(४)
प्रकृति रोई
लगा लाशों का ढेर
डूबे शहर
(५)
डूबी बस्तियां
केदारनाथ अब
बना श्मशान
(६)
मत खेलना
कभी प्रकृति से,थी
ये चेतावनी
(७)
मिट्टी बांधते
पेड़ - पौधे जड़ों से
न काटो इन्हें
(८)
कटते पेड़
उफनती नदियाँ
भू-स्लखन
१६ जून २०१३ को उत्तराखंड में भारी बारिश से आई तबाही पर.....
रोया केदारनाथ ....
इक तबाही
कयामत भरी रात में
ले डूबी हजारों सपने
हजारों ख्वाहिशें , हजारों ख्वाब
बह गई बस्तियां
उजड़ गए घर बार
टूटे पहाड़ , आया सैलाब
टूटे संपर्क , रूठी जिंदगियां
खौफनाक चीखें और मलबे का ढेर
लाशों का मंज़र , कुदरत का कहर
जल का तांडव बचा न कोई
मची तबाही हाल बेहाल
बंद आँखों में हजारों सवाल
देव भूमि में बरपा आज कहर
लील ले गई उफनती लहर
सूने हो गए घर के चिराग
कैसी ये विभीषिका
कैसा या सैलाब .....?
उजड़ा उत्तराखंड
रोया केदारनाथ ....
कुछ हाइकु ....
महाकाल के
आगोश में समाया
उत्तराखंड
(२)
फटा बादल
उमड़ा यूँ सैलाब
आया प्रलय
(३)
कुदरत ने
कहर बरपाया
मची तबाही
(४)
प्रकृति रोई
लगा लाशों का ढेर
डूबे शहर
(५)
डूबी बस्तियां
केदारनाथ अब
बना श्मशान
(६)
मत खेलना
कभी प्रकृति से,थी
ये चेतावनी
(७)
मिट्टी बांधते
पेड़ - पौधे जड़ों से
न काटो इन्हें
(८)
कटते पेड़
उफनती नदियाँ
भू-स्लखन
१६ जून २०१३ को उत्तराखंड में भारी बारिश से आई तबाही पर.....
रोया केदारनाथ ....
इक तबाही
कयामत भरी रात में
ले डूबी हजारों सपने
हजारों ख्वाहिशें , हजारों ख्वाब
बह गई बस्तियां
उजड़ गए घर बार
टूटे पहाड़ , आया सैलाब
टूटे संपर्क , रूठी जिंदगियां
खौफनाक चीखें और मलबे का ढेर
लाशों का मंज़र , कुदरत का कहर
जल का तांडव बचा न कोई
मची तबाही हाल बेहाल
बंद आँखों में हजारों सवाल
देव भूमि में बरपा आज कहर
लील ले गई उफनती लहर
सूने हो गए घर के चिराग
कैसी ये विभीषिका
कैसा या सैलाब .....?
उजड़ा उत्तराखंड
रोया केदारनाथ ....

