Thursday, June 17, 2010

राजेंद्र जी का दिया हीर को तोहफा ........



बदल न सकी मैं हाथों की लकीरें
हाथ तो बहुत मिले खुशगवार ह्बीबों के ......


लकीरें तो नहीं बदलतीं ....पर हाँ पल दो पल की ये खुशियाँ बरसों की तल्खियात को कमोबेश कम तो कर ही देती हैं ....आज राजेंद्र जी का दिया ये तोहफा आप सब के साथ बांटना चाहती हूँ .....राजेंद्र जी से तो आप सभी परिचित हैं ही .....रब्ब ने मुसीकी में इन्हें अद्भुत हुनर बख्शा है ....खुद अपनी ही बनाई धुन पर ये गज़ब का गाते हैं .....आज हीर के लिए इन्होने ...."दर्द भरी सरगम हरकीरत " गाकर जो इज्जत बख्शी है ....हीर धन्य हुई ....रब्ब इन्हें और शोहरत दे ,और हुनर दे , जहाँ में इनका नाम फरोजां रखे ....सच्च इस तरह के तोहफे कई कीमती तोहफों से ज्यादा मायने रखते हैं ....जो मित्र इनकी खुशबू से परिचित नहीं हैं वो इनके ब्लॉग par जाकर इन्हें महसूस कर सकते हैं .....
नीचे की लिखी मेरी दो ग़ज़लों को इन्होंने अपना स्वर दिया है ....और ये तस्वीर भी इन्हीं की भेजी हुई है इसलिए इसे लगाने पर मैं मजबूर हुई .....

पेश है पहले राजेंद्र जी की गाई ग़ज़ल .....दर्द भरी सरगम हरकीरत ......

( जब राजेन्द्र ने हीर की बहुत सारी कविताएं पढ़ लेने के बाद उसकी अलग छवि महसूस की …)

(1)




दर्द भरी सरगम हरकीरत.......

दर्द भरी सरगम हरकीरत
लौ जलती मद्धम हरकीरत

क्यों पलकें हैं नम हरकीरत
बदलेगा मौसम हरकीरत


दिल पर अपने पत्थर रखले
पत्थर मीत – सनम हरकीरत



अश्क़ तेरे पी’ भीगा सहरा
सुलग उठी शबनम हरकीरत

हर इक शय यूं कब होती है
बेग़ैरत – बेदम हरकीरत

रब की दुनिया में तेरा भी
है हमग़म – हमदम हरकीरत


बेशक , चोट लगी है तुमको
तड़प रहे हैं हम हरकीरत

ज़ख़्म तेरे लूं पलकों पर , दूं
अश्कों का मरहम हरकीरत

इंसां ही बांटे इंसां के
दर्द मुसीबत ग़म , हरकीरत


- राजेन्द्र स्वर्णकार
इसे यहाँ सुन सकते हैं .....





(2)

दोहे ( राजेन्द्र ने हीर को उसके कंमेंट्स के आधार पर जितना जाना …)

हर कीरत , हर जानता , या कोउ साचा पीर !
निज छबि देखन जगत को , दी
हरकीरत ' हीर '
!!

निर्मल मन हैं आप …ज्यों , बहता निर्मल नीर !
आप ख़ुशी - मुसकान हैं , धन
हरकीरत ' हीर ' !!

लफ़्ज़ - लफ़्ज़ में है शहद , मिसरी , अमृत , शीर !
शुक्राना रब ! जगत को , दी
हरकीरत ' हीर ' !!


हाल देख , रब ! रहम कर ! जग कितना बेपीर !
दी इक ही ; क्यों दी नहीं … लख
हरकीरत ' हीर ' !?

रब ! अब कर संसार की , तू ऐसी तक़दीर !
हर घर को तू बख़्शदे , इक
हरकीरत ' हीर ' !!

- राजेन्द्र स्वर्णकार

(3)

हीर की लिखी इस ग़ज़ल को भी स्वर दिए है राजेंद्र जी ने .......
रात पहलू में आ'कर कोई सो गया.....


रात पहलू में आ'कर कोई सो गया
दिल में आया कोई और मेरा हो गया

इक सितारे ने महफिल में चूमे क़दम
शर्म से चांद उठ' अपने घर को गया

ख़्वाब मेरे महकने लगे ; कौन ये
मोगरे की फसल सांस में बो गया

छा गया है ख़यालों में वो इस कदर
गीत ज़िंदा कोई नज़्म में हो गया

हो गई है मुहब्बत , बचा रब मेरे
दिल गया हाथ से , ये गया , वो गया

दिल लिया , दर्दे- दिल भी मेरा ले लिया
तब ज़रा - सा यक़ीं मुझको हो तो गया

हीर सच्ची मुहब्बत मुबारक तुझे
कोई है , प्यार में जो तेरे खो गया


इसे यहाँ सुन सकते हैं ......









(४)


और अब वो ग़ज़ल जो आप पहले भी पढ़ चुके हैं ...बस मत्ला बदला गया है .....

हमेशा चाहतों के सिलसिले...........

हमेशा चाहतों के सिलसिले क्यूं छूट जाते हैं
मुहब्बत से भरे मा'सूम दिल क्यूं टूट जाते हैं

नज़र हो मुंतज़िर कोई ; कभी हम लौट भी आते
उमीदों के घरौंदे ही तो अक्सर टूट जाते हैं

शज़र हम जो लगाते हैं , वो अक्सर सूख जाते हैं
मुहब्बत हम जहां करते , शहर वो छूट जाते हैं

जफ़ा देखी वफ़ा देखी , जहां की हर अदा देखी
नकाबों में , चमन ख़ुद बाग़बां ही लूट जाते हैं

हवाओं से बिखरती जा रही बेबस , वो कश्ती हूं
बहाना था वगरना दिल कहां यूं टूट जाते हैं

कभी तो मुस्कुरा कर भी सनम देते सदा मुझको
बहारें लौट आतीं , फिर… गिले सब छूट जाते हैं

घरौंदे साहिलों पर 'हीर' तुम बेशक बना लेना
बने हों रेत से घर …वो बिखर कर टूट जाते हैं

- हरकीरत 'हीर'
******************************************************


इसे यहाँ सुन सकते हैं ......




72 comments:

डॉ टी एस दराल said...

वाह , वाह , वाह ! हरकीरत जी , एक से बढ़कर एक ।

आज तो दिल बाग़ बाग़ हो गया ।
आपकी ग़ज़लों में कहीं खो गया ।

मुबारकवाद दे ही डालें अब तो ।
किसी ख़ुशी का इंतज़ार हमको भी है ।

वन्दना said...

राजेंद्र जी की आवाज़ मे तो जादू है………………एक कशिश ,एक दर्द क्या कुछ नही है……………आवाज़ ने ही दिल मोह लिया…………उस पर गज़ल के अल्फ़ाज़ का तो कहना ही क्या…………………सीधे दिल मे उतरती चली गयी……………………बेहतरीन,लाजवाब्।

shikha varshney said...

उफ़ कितना कर्णप्रिय स्वर है राजेन्द्र जी का ..और लाजबाब ग़ज़लें ..बहुत बहुत सुन्दर हरकीरत जी !

सुलभ § Sulabh said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
अच्छे स्वर और शब्दों की बारिश हुई है.

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

सब तो बहुत अच्छा है !
क्या गजल ! क्या गायन ! क्या भाव !
प्रसन्नता-प्रद तोहफा !

मोहिन्दर कुमार said...

रचनाओं को सुरों में ढालने का उत्तम सफ़ल प्रयास... दिलकश रचनायें दिलकश अन्दाज में पेश... आभार

RAJNISH PARIHAR said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
राजेंद्र जी की आवाज़ मे तो जादू है

Mukesh Kumar Sinha said...

Gajal aur dohe ke har shabd ka kya kahna......:) jabab nahi!!
upar se Rajendra jee kee jadui awaaj....ek alag sa dard aur kashish.....!!

har kuchh umda!!

naye post ke saath mera blog......:o

ओम पुरोहित'कागद' said...

राजेन्द्र तो राजेन्द्र
अलग है स्वर्णकार
शब्दोँ का बाज़ीगर
स्वरोँ का फनकार ।
हरकीरत को गा कर धन्य कर दिया ।बधाई हो हरकीरत जी !
राजेन्द्र स्वर्णकार बेहतरीन ग़ज़ल गो हैँ। ग़ज़ल कहते भी अच्छी हैँ और गाते भी अच्छी हैँ।आपकी ग़ज़ल गाने के लिए न जाने उनको कैसे फुरसत मिल गई ! एक बार फिर बधाई!
आपकी ग़ज़लोँ मेँ भी दर्द ओ कशिश कम नहीँ है हरकीरत जी ।शायद उसी ने राजेन्द्र को कायल-घायल किया है।

हरकीरत ' हीर' said...

जी ओम पुरोहित जी ,
ये तो रब्ब जाने इस स्वरों के फनकार ने कैसे इतना समय मेरी गजलों को दिया ...न सिर्फ मेरी बल्कि मेरे लिए लिखी भी .....और गयी भी .....तीन दिन इन्होने कड़ी परेशानी से गुजरने के बाद इसकी रिकार्डिंग की ...मसलन हैड फोन का खराब हो जाना ....सर दर्द ...और बार बार की रिकोर्डिंग ....रात दो-दो बजे तक बैठ कर ....जब इन्होने मेल से मुझे ये सब बताया ....तो अपने पर फख्र सा होने लगा ...बहुत मुश्किल होता है किसी को यूँ समय देना ....और मेरे पास तो उन्हें देने के लिए दुआओं के सिवा कुछ नहीं .....रब्ब उनके फन को कामयाबी दे .....!!

amritwani.com said...

gazab thaya aap ne bhi rajendar ji

bahut khub

dhanyawad aap ko ye bahtrin tohfa ham tak pahuchane ke liye

aarkay said...

एक रचनाकार का दूसरे रचनाकार को दिया गया बेशकीमती व बेहतरीन तोहफा .
आप दोनों ही बधाई के पात्र हैं.

प्रियदर्शिनी तिवारी said...

बहुत खूब शानदार प्रस्तुती

'उदय' said...

.... बधाई व शुभकामनाएं!!!

रचना दीक्षित said...

राजेंद्र जी की आवाज़ मे जादू,स्वर कर्णप्रिय है गज़ब की जादूगरी शब्दों से !!!!!!!!!!!!!वाह.. वाह वाह हरकीरत जी !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत गहराई है राजेंद्र जी की आवाज़ में...बहुत सुन्दर

साहिल said...

अद्भुत.... इसके सिवा आैर क्या कहूं।
कमाल है.... आपकी लेखनी भी आैर राजेन्द्र जी की आवाज़ भी।
शुक्रिया....बहुत-बहुत शुक्रिया।

ज्योति सिंह said...

ek se badhkar ek harek ,sachmuch anmol hai yah tohfa jo nashwar hai jo kano me amrit gholta .heer gakar rajendra ji ne char chand laga diye sach kaha aapne aese kadradan kam milte hai ,dua ke alawa har shai fiki hai ......laazwaab khoobsurat

Avinash Chandra said...

Behad khubsurat aawaj Rajendra ji, badhayee ho.

Aur Harkirat ji, aap waqai is prashansa ki shat pratishat hakdaar hain :)

likhne ka shukriya

सुशीला पुरी said...

आपको बहुत बहुत बधाई !!!! खुशनसीब हैं आप हरकीरत जी ! आज के समय मे कोई किसी सुनना भी नही चाहता ... और आपको तो राजेंद्र जी ने गाया .......कमाल है !

संजय कुमार चौरसिया said...

हरकीरत जी , एक से बढ़कर एक ।


http://sanjaykuamr.blogspot.com/

Maria Mcclain said...

interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this site
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डॉ टी एस दराल said...

क्यों पलकें हैं नम हरकीरत
बदलेगा मौसम हरकीरत

इंसां ही बांटे इंसां के
दर्द मुसीबत ग़म , हरकीरत

इन पंक्तियों से पूर्णतया सहमत ।

हीर सच्ची मुहब्बत मुबारक तुझे
कोई है , प्यार में जो तेरे खो गया

मुबारक जी मुबारक।
राजेन्द्र जी की बनाई तस्वीर की तारीफ इसलिए नहीं कर पा रहे क्योंकि तारीफ लायक लफ्ज़ ही नहीं मिल रहे जी ।

Archana said...

आपको राजेन्द्र जी से तोहफ़ा मिला ....और आप्ने हमे दिए तोहफ़े.......वाह बहुत खूब !!!!

चैन सिंह शेखावत said...

शब्द और स्वर का अद्भुत समागम देखने को मिला इस पोस्ट में। हरकीरत जी बहुत अच्छी ग़ज़लें और नज्में लिखती हैं। राजेंद्र जी अपने स्वर के लिये एक सही रचनाकार को ही चुना.इनकी धीर गंभीर आवाज़ ने हरकीरत जी के भावों को साकार कर दिया। दोनों महानुभावों को बहुत बहुत बधाई

श्यामल सुमन said...

सुन्दर शब्द और स्वर-संयोग। बधाई हरकीरत जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

अल्पना वर्मा said...

राजेंद्र स्वर्णकार जी ने आप के लिए आप पर इतनी खूबसूरत गज़लें लिखीं और उस पर उन्हें अपने शानदार स्वर में प्रस्तुत किया भी...पढ़ कर सुनकर बहुत ही खुशी हुई .
..आप में खासियत तो है ही आप लिखती इतना अच्छा हैं..कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता.
वे तो खुद ही बहुत अच्छा लिखते हैं इसलिए उन्हें अच्छा लिखे की पहचान भी है.
उन्हें और आप को बहुत बहुत बधाईयाँ और आभार इस तोहफे को हम सब में बांटने के लिए.

rashmi ravija said...

शब्दों और स्वर का अनूठा संगम...बहुत ही सुन्दर संयोजन..
एक संग्रहणीय पोस्ट...बार बार सुनने और पढने को दिल चाहे

Udan Tashtari said...

ये पन्ना तो हमने अब बुकमार्क कर लिया//बेहतरीन..जबरदस्त!! आनन्द आ गया सुनकर.

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!एक से बढ़कर एक ।

हरकीरत ' हीर' said...

दराल जी ,
हा...हा...हा....आपकी चुहलबाजी अच्छी लगी ...!!
वैसे बता दूँ ये ग़ज़ल मैंने बहुत पहले की लिखी थी और इसे तिलकराज जी ने इस्लाह किया था ...पर आज जब मैंने राजेंद्र जी से इसे गाने की फरमाइश की तो इन्होंने इसे अपनी सुविधा अनुसार रदीफ़ और काफिया बदल दिया .....और आपको मौका मिल गया ....खैर कभी हमारी बारी भी आएगी ......!!

बेचैन आत्मा said...

क्यों पलकें हैं नम हरकीरत
बदलेगा मौसम हरकीरत

बेशक , चोट लगी है तुमको
तड़प रहे हैं हम हरकीरत

...सुंदर गजल, मीठी आवाज.
बेचैन मगन हो गया आज.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

क्या खूब तोहफ़ा है हरकीरत जी. अभी ऑडियो नहीं सुना, फ़ुरसत मिलते ही सुनूंगी.

neera said...

वाह! हरकीरत जी... शब्दों की तारीफ़ करूँ या स्वर की... इसे कहते हैं सोने पर सुहागा...

Rajendra Swarnkar said...

"राजेंद्र जी का हीर को तोहफा ........"

पोस्ट का शीर्षक ग़लत लिखा है ।
लिखना चाहिए था …

"हीर का राजेंद्र को तोहफा… !"

तोहफ़ा तो हीरजी ने ही राजेन्द्र को दिया है दरअस्ल !
आप सबने हीरजी के सुर में सुर मिला कर मेरी इतनी ता'रीफ़ की है ,
कि मैं असमज़स में हूं कि शुक्रिया पहले किसका अदा करूं … आप सब करमफ़र्माओं का या हीरजी का ?

मित्रों ,यहां मन की एक बात कर रहा हूं …
हिंदी ब्लॉगिंग में साहित्य और कलाओं से संबद्ध ब्लॉगों पर
ख़ुलूसो-मुहब्बत , सहयोग-सौहार्द , आत्मीयता -अपनत्व की ऐसी साझा पोस्टों की एक शृंखला चलनी चाहिए ।

मैं विशेष निजी कारणों से टिप्पणी बक्से में देरी से आया , मा'फ़ कर दीजिएगा ।
आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया ! आभार ! धन्यवाद !

शस्वरं पर भी आप सबका हार्दिक स्वागत है ,
आशीर्वाद देने के लिए अवश्य पधारें !

बुला लेना मुझे अपना समझ कर जब भी तुम चाहो
फ़ना मैं क्यों न हो जाऊं , कहीं कुछ काम आ जाऊं


- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

वाणी गीत said...

निर्मल मन हैं आप …ज्यों , बहता निर्मल नीर !
आप ख़ुशी - मुसकान हैं , धन हरकीरत ' हीर ' !!...
कौन नहीं मानता होगा ...
आप पर लाख गज़लें लिखी जाये तो भी कम ...
राजेंद्र जी की आवाज़ में आपकी ग़ज़ल ...क्या कहने ...
कम्प्लीट पॅकेज है आज की पोस्ट ...!!

निर्मला कपिला said...

बहुत खूबसूरत प्रस्तुती दोनो को बधाई

अरुण मिश्रा said...

गज़लेँ तो सभी हीरे
सी जगमगा रही हैँ।
अभी सुन नहीँ पाया
जल्द सुनूँगा।
बहुत बधाई।

Monika said...

वाह जितनी तारीफ की जाए कम है

नीरज गोस्वामी said...

राजेंद्र जी का कहना ठीक है आपकी रचनाओं में इतनी कशिश और ख़ूबसूरती है के अनायास ही गुनगुनाने गाने का दिल करता है...फिर भी राजेंद्र जी ने जितना ख़ूबसूरती से लिखा है उतनी ही ख़ूबसूरती से गया भी है...उनके गले में माँ सरस्वती का वास है...उम्मीद है आपकी दूसरी रचनाएँ भी उनके सुरीले गले से सुनने को मिलेंगी...
आज का दिन सफल हुआ...बाहर इश्वर बरसात करवा रहा है और अन्दर राजेंद्र जी ने सुरों की बारिश कर दी...वाह...अभिभूत हुआ पढ़ सुन कर...
नीरज

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... एक से बढ़ कर एक .... राजेन्दर जी कई आवाज़ का जादू चल गया ... में तो अभी भी इस कशिश भारी आवाज़ का मज़ा ले रहा हूँ .... ऊपर से आपकी ग़ज़ल के अल्फ़ाज़ ... जब दो फनकार मिलते हैं तो शब्दों को मायने मिल जाते हैं ... और ठीक ऐसा ही हो रहा है आपके ब्लॉग पर आज ....

रश्मि प्रभा... said...

कदम दर कदम मोंगरे के फूल महकते रहे , हम खुशबुओं को सुनते रहे

हिमान्शु मोहन said...

क्या ख़ूब निभाई ग़ज़ल 'राजेन्द्र'(जी) ने 'हीर' की
स्वर पीर में डूबा - तो अदा थी फ़कीर की
सूखे गुलों में कोई उड़ेले नई ख़ुश्बू-
अच्छी लगी अदा ये सुरों के अमीर की

विजयप्रकाश said...

वाह...आपके शब्द और राजेन्द्र जी की आवाज...जैसे सोने में सुगंध

ललित शर्मा said...

पूरा सुन के कमेंट करता हुँ जी
वैसे बहुत अचछा गाया है रजिन्दर जी ने।

RAJ SINH said...

दुर्भाग्य !
जहाँ मै हूँ वहां पर स्वर सुनवाने की क्षमता सुलभ नहीं . सिर्फ कल्पना . पर शब्दों में ही हर समाये हैं ; ' कीरत ' और ' हीर ' .

चश्मेबद्दूर !

boletobindas said...

क्या बात है। एक तो अनमोल शब्द आपके हीर जी। उस पर दिल को छूती आवाज। इसी को कहते हैं सोने पे सुहागा.....

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

आप दोनों को सफ़लता के लिए ढेरों शुभकामनाएं.

Dr.Ajmal Khan said...

मैं बस यही कहूगा कि दो उस्तादो का मिलना कमाल कर गया, दोनो की क़लम बेमिसाल है.
और राजेंद्र जी गायन भी बहुत खूबसूरत है.
हीर जी और राजेंद्र जी लिये बस यही दुआ है कि
"अल्लाह करे ज़ोरे क़लम और ज़्यादा"
आमीन.

sanu shukla said...

jitne sindar shabd hai utne hi sundar awaj me gaya gaya hai...

महेन्द्र मिश्र said...

लाजबाब प्रस्तुति हमेशा की तरह ...आभार

Divya said...

awaaz aur ghazlein..dono behad khoobsurat hain...Badhai

Manish Kumar said...

ये तो बड़ा ही नायाब तोहफ़ा दिया राजेंद्र जी ने हम सब को। कुछ ग़ज़लें सुनी कुछ सुनने के लिए दोबारा आना पड़ेगा।

राकेश कौशिक said...

राजेंद्र जी और आपको - दोनों को हार्दिक बधाई

राम त्यागी said...

बहुत बढ़िया , नायब गजलें
और राजेंद्र जी की आवाज ने चार चाँद लगा दिए इसमें :)

Rajendra Swarnkar said...

आदरणीया हरकीरत हीर जी
नमस्कार !
मुफ़्लिस साहब ने मुझे मेल भेजी , जो यहां कॉपी - पेस्ट कर रहा हूं…

********************************
muflis dk
to me

show details Jun 20 (2 days ago)
सम्माननीय राजेंद्र जी

नमस्कार

आपकी पुरसोज़ और पुर-कशिश आवाज़ का जादू
अभी तक कानो में गूँज रहा है
अभी हीर जी के ब्लॉग पर हो कर आया हूँ
शब्द और स्वर का अनुपम मेल रंग ले ही आया है
शब्द ,,, बेहद पाकीज़ा और असरदार शब्द तो मानो
हीर जी की क़लम की नोक पर बैठे हीर जी के आदेश का इंतज़ार ही करते रहते हैं
और उस पर आपकी खूबसूरत , गहरी , जादुई आवाज़ ने तो
हरकीरत जी की हर रचना को नई ज़िन्दगी बख्श है ....
आप दोनों को बहुत बहुत बधाई .
माँ सरस्वती जी की अपर कृपा आप दोनों रचनाकारों पर यूं ही बनी रहे ... अस्तु .

ख़ैर ख्वाह ,

'मुफ़्लिस'

*********************************
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

nice ghazals

manu said...

कई दिन बाद आये...
और एक साथ कई रचनाओं का लुत्फ़ उठा लिया...
समझिये के बल्ले बल्ले...शावा शावा हो गया.....
:)

ईश्वर आप दोनों कलाकारों के फन को और उंचाइयां बख्शे...!

manu said...

कई दिन बाद आये...
और एक साथ कई रचनाओं का लुत्फ़ उठा लिया...
समझिये के बल्ले बल्ले...शावा शावा हो गया.....
:)

ईश्वर आप दोनों कलाकारों के फन को और उंचाइयां बख्शे...!

mehhekk said...

waah behad sunder

vipinkizindagi said...

आपकी गजल.....बेहतरीन और सुन्दर

Tripat "Prerna" said...

wah wah! kya baat hai!

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i just hope u will like it!

सुरेश यादव said...

हरकीरत जी,शब्द और आवाज़ मिल करजादू सा असर दे गए हैं. संवेदना की दुनियां में एक कचोट.राजेन्द्र जी और आप दोनों को बहुत बहुत बधाई.

Manoj Bharti said...

सुंदर ...अति सुंदर ...इसी लिए कहते हैं कि जैसे -जैसे कलाकार कला को गढ़ता है, वैसे ही कला भी कलाकार को गढ़ते हैं और राजेन्द्र जी तो हरकीरत की रचना में समा ही गए हैं जी ...

स्वाति said...

एक से बढ़कर एक ग़ज़लें।

Shayar Ashok said...

नज़र हो मुंतज़िर कोई ; कभी हम लौट भी आते
उमीदों के घरौंदे ही तो अक्सर टूट जाते हैं

शज़र हम जो लगाते हैं , वो अक्सर सूख जाते हैं
मुहब्बत हम जहां करते , शहर वो छूट जाते हैं

....वाह !! वाह !! हरकीरत जी ...
बहुत खूब ...
ग़ज़ल सुनते हुए, पढने का आनंद ही कुछ और है ||
तारीफ़ में क्या लिखूं , निःशब्द हूँ ||

sada said...

इंसां ही बांटे इंसां के
दर्द मुसीबत ग़म , हरकीरत

बहुत -बहुत बधाई आपको, इतने सुन्‍दर शब्‍दों का चयन लाजवाब कर दिया राजेन्‍द्र जी ने ।

kumar zahid said...

राजेन्द्र जी ने आपको देखने के लिए बेहद खूबसूरत आंखें पाई है...रोजन्द्र जी की आंखें ताकयामत सलामत रहें कि आपका नूर छलकता रहे..

vinay said...

मुबारक राजेन्द्र जी का बेशकीमती तोहफा ।

vinay said...

मुबारक राजेन्द्र जी का बेशकीमती तोहफा ।

अरूण साथी said...

लाजबाब

बहुत खूब......

AJIT NEHRA said...

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