Sunday, November 29, 2009

कुछ क्षणिकायें ........

सुइयों की पोटली है .....जो अक्सर सुलगाती रहती है इक आग ....वह अंधेरे में छोटी-बड़ी लकीरें खींचती है .....सीढियों से अँधेरा उतर कर आता है .....और रख देता हैं पाँव.....बड़ी लकीर मिट जाती है .....वह फ़िर छोटी हो जाती है ....बहुत छोटी .....हक़ीर सी .....!! '' कुछ क्षणिकायें .....''


(१)

तलाक
......................

हशी बादल

जमकर
बरसे फ़िर कल रात


सुई जुबां से लहू कुरेदती रही

सबा तो खामोश रही दोनों के बीच

बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!

(२)

कफ़न
....................

मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

चुरा ले गई कफ़न मेरा

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!

(३)

पत्थर होते छाले
...................................

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

और रफ्ता -रफ्ता दिल के छाले

पत्थर होते गए.....!!

(४)

गिला
.............

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है

वह जाते-जाते छू गया ......!!

(५)

तू ही बता
.........................

मैंने ज़िस्म में

जितने भी मुहब्बतों के बीज थे

तेरे नाम की लकीरों पे बो दिए हैं

अब तू ही बता मैं ख्यालों को

किस ओर मोडूं .....!?!

(६)

अर्थियाँ
.........................


मोहब्बत खिलखिला के

हंसने ही वाली थी के गुज़र गई

कुछ अर्थियाँ फ़िर करीब से .....!!

87 comments:

महफूज़ अली said...

बहुत ही खूबसूरत क्षणिकाएं.......

मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

चुरा ले गई कफ़न मेरा

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!

इन पंक्तियों ने मन मोह लिया........


बहुत सुंदर ..... अति सुंदर......

SACCHAI said...

bahut hi sunder shanikaye

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया ......!!

" gaherai se bharpur baat kardi chand alfaz me aapne "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

खुशदीप सहगल said...

हरकीरत जी,

तलाक, कफ़न, पत्थर होते छाले, गिला, तू ही बता, अर्थियां...

क्या ये सारे शब्द पर्यायवाची नहीं लगते...

जय हिंद...

shikha varshney said...

मैंने ज़िस्म में

जितने भी मुहब्बतों के बीज थे

तेरे नाम की लकीरों में

बो दिए हैं ....

अब तू ही बता ....

मैं ख्यालों को

किस ओर मोडूं .....!?!

bahut khubsurat kshanikaayen hain..gehre bhav liye.

Udan Tashtari said...

मोहब्बत खिलखिला के

हंसने ही वाली थी

कि गुज़र गई फ़िर

कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!

--उफ्फ!!!

आपको जब भी पढ़ता हूँ..बहुत देर को मौन हो जाता हूँ और विल्स कार्ड को निकालने की इच्छा हो उठती है..आज शाम फिर...

Amrit said...

पत्थर होते छाले
...................................

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

रफ्ता -रफ्ता ....

दिल के छाले

पत्थर होते रहे .....!!

...wah..! this one is best.. i remembered a small poem by Brecht..

कमजोरियां
तमहारी कोई नहीं थी
मेरी थी एक
मैं करता था पयार....

neera said...

क्या बात है!

M VERMA said...

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!
छू लेने वाली रचनाएँ. इतना करीबी, इतना दर्द और ---

वाणी गीत said...

वहशी बादल जमकर बरसे फ़िर रात
सुई जुबां से लहू कुरेदती रही
सबा तो खामोश रही दोनों के बीच
बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!
क्या बात है ....
ये क्षणिकाएं कहाँ हैं ....दर्द उगलते जख्म है ....लफ्ज़ गहरे उतरते हैं सीधे सीने में ...एक टीस और हूक उठती है ....गज़ब ये है की ये दर्द कोई मरहम भी नहीं चाहता ....यूँ ही रिसता रहे....!!

Apanatva said...

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

रफ्ता -रफ्ता ....

दिल के छाले

पत्थर होते रहे .....!
kitana sunder likhatee hai aap ?
ek ek kshnika bemisaal hai! Subhanallah !!!

अजित वडनेरकर said...

जबर्दस्त ...
सशक्त, सुंदर अभिव्यक्ति।

Devendra said...

मैं कफ़न उतार के बैठी थी
कुछ हसीं रूहें .....
चुरा ले गई कफ़न मेरा
तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से
मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!
--वाह! यह तो खूब रही..
अरे, संभलकर, कोई बेचैन आत्मा भी ब्लाग पढ़ सकता है..
हा.. हा.. हा..

Einstein said...

मोहब्बत खिलखिला के

हंसने ही वाली थी

कि गुज़र गई फ़िर

कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!
छू गयी अन्तर्मन को .....शब्द को सार्थक कर जाती हैं आप.बस इतना ही कह सकता हूँ मैं
आपकी रचनाओं को पढ़कर.....

मनोज कुमार said...

मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

चुरा ले गई कफ़न मेरा

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!
खूबसूरत क्षणिकाएं .. बहुत सुंदर

ललित शर्मा said...

मोहब्बत खिलखिला के

हंसने ही वाली थी

कि गुज़र गई फ़िर

कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!

हरकीरत जी "बहुत सुंदर क्षणिंकाएं" आभार

MUFLIS said...

वहशी बादल जमकर बरसे फ़िर रात
सुई जुबां से लहू कुरेदती रही
सबा तो खामोश रही दोनों के बीच
बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!

मैंने ज़िस्म में
जितने भी मुहब्बतों के बीज थे
तेरे नाम की लकीरों में
बो दिए हैं ....
अब तू ही बता ....
मैं ख्यालों को
किस ओर मोडूं .....!?!

sabhi kshnikaaeiN bahut prabhaavshali bn padee haiN,,,
lekin ye do khaas taur pr mn ko kaheeN kheench le gaeeeeN .

bahut achaa...
hamesha ki tarah . . .

Kishore Choudhary said...

तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा.

एक पंक्ति में नज़्में आपके इधर ही हुआ करती है. सब बेहतरीन है मुहब्बत के बचे रहने का उदघोष करती हुई, दिल के कोनों में चुभे हुए, टूटे पलों के नश्तर को सहेजती हुई और मन हाल का बयान करती हुई. मुझे हर बार पढ़ते हुए ख़ुशी होती है कि आप मुहब्बत के नाम सिर्फ इश्क ओ जाम, ग़म और ख़ुशी जैसे गहरे किन्तु चलताऊ शब्दों से अलग रोजमर्रा के जीवन से ऐसे लफ्ज़ चुनती हैं कि वे सीधे दिल तक उतरते हैं. एक क्षणिका में मैंने पाया कि वह पहलीदो पंक्तियों में ही मुकम्मल है, है न अजब ... गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप/ मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले. हीर साहिबा जी आप अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच यूं हम सब के लिए समय निकाल कर नियमित लिखती हैं और कभी संजीदा करते हुए भी मुहब्बत अल्टीमेट है याद दिला जाती हैं... शुक्रिया. आपकी लेखनी की नोक पर सूरज जितना नूर बना रहे.

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

आया हूँ, काँप गया हूँ...अभी वाजिब टिप्पणी नहीं कर पाऊंगा..फिर आऊंगा...!!!

महफूज़ अली said...

फिर से आना पडा..... बहुत अच्छी लगीं क्षणिकाएं.....

बधाई....

अनिल कान्त : said...

इंसान जब रिश्तों, संबंधों, एहसासों पर लिखता है तो कहीं ना कहीं अपने आस पास के अनुभव, अपने निजी अनुभव बयान करता है. हर शब्द जब कुछ बोलता सा नज़र आता है तब लगता है कि ये रचना अपने आप में सम्पूर्ण हो ली है. मैं हमेशा आपकी रचनाओं में वो सब पाता हूँ

सुमित तोमर said...

behtareennn...

निर्मला कपिला said...

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

रफ्ता -रफ्ता ....

दिल के छाले

पत्थर होते रहे .....!!


मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

चुरा ले गई कफ़न मेरा

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!
बहुत खूब सभी क्षणिकायें एक से एक बढ कर हैं बहुत बहुत बधाई

अल्पना वर्मा said...

मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

'चुरा ले गई कफ़न मेरा'

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ...

__gazab ka likha hai aapne.!
Sabhi ek se badhkar ek...

mehek said...

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया
waah kya baat hai,bahut sunder

Mithilesh dubey said...

पूरी रचना ही लाजवाब रही आपकी । आपके शब्दो का चयन, और उनका प्रयोग बखूबी किया गया है । बहुत-बहुत बधाई

वन्दना said...

kshnikayein kya ye to wo anmol moti hain jinhein aap dil ke sagar ki anant gahraiyon se nikal kar layi hain.
kis kshanika kahun ya kis shabd kahun.........kis kis k tarif karun........rooh mein itni gahri utar gayi hain ki kuch pal ke liye shabd bhi maun ho gaye .........hosh aaya to ab likhne baithi hun.

agar ho sake to ye kshanikayein aap mujhe mail kar dijiye .......sahej kar rakhna chahti hun.

रश्मि प्रभा... said...

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

रफ्ता -रफ्ता ....

दिल के छाले

पत्थर होते रहे .....!!वाह !
पर आलम है कि किसकी तारीफ करूँ,किसे छोडूँ.......सारे ख्याल दिल से बातें कर रहे हैं

डॉ .अनुराग said...

मैंने ज़िस्म में

जितने भी मुहब्बतों के बीज थे

तेरे नाम की लकीरों में

बो दिए हैं ....

अब तू ही बता ....

मैं ख्यालों को

किस ओर मोडूं .....!?!


superb............

ऐसा लगता है जब इस मूड में होती है तब अपना बेस्ट देती है ......

डॉ टी एस दराल said...

वहशी बादल जमकर बरसे फ़िर रात

सुई जुबां से लहू कुरेदती रही

सबा तो खामोश रही दोनों के बीच

बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!

kitna dard chhupa hai, gazab!!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

खूबसूरत क्षणिकाएं ...मुझे तो सब ही बेहतरीन लगी ..सब में एक नया रंग है .शुक्रिया

अजय कुमार said...

दर्द भरी और सन्न कर देने वाली क्षणिकाएं.......

Dimple Malhotra said...

मैंने ज़िस्म में

जितने भी मुहब्बतों के बीज थे

तेरे नाम की लकीरों में

बो दिए हैं ....

अब तू ही बता ....

मैं ख्यालों को

किस ओर मोडूं .....!?!ultimate...jaise modh lena apne bas me ho..uski khusboo nas nas me ho.....

सागर said...

इश्क़िया और विरह का मौसम सदाबहार होता है...

manjeet said...

ek se badkar ek hai kshinkaayein

kaise taarif karoon kuchh samjh nahi aa raha

दिगम्बर नासवा said...

सब की सब बेजोड़ .... कमाल की .......... निःशब्द कर दिया ....... कुछ कह नही पा रहा ..... बस बेमिसाल, लाजवाब ......

ताऊ रामपुरिया said...

निशब्द हुं. बेहद लाजवाब. नमन आपको.

रामराम.

हरकीरत ' हीर' said...

@ समीर जी विल्स कार्ड का इन्तजार है ......!!

@ देवेन्द्र जी आत्माओं को भला क्या खौफ .....!?!

@ किशोर जी मुझे उम्मीद थी आप इसी पंक्ति को सराहेगें .......!!

@श्रीश जी दोबारा इन्तजार है ......!!

@ वंदना जी जरुर ......!!

@डिम्पल जी आपका जवाब कुछ समझ नहीं आया ......" ultimate...jaise modh lena apne bas me ho..uski khusboo nas nas me ho....."

मैंने ज़िस्म में
जितने भी मुहब्बतों के बीज थे
तेरे नाम की लकीरों में
बो दिए हैं ....
अब तू ही बता ....
मैं ख्यालों को
किस ओर मोडूं ...?

yahaan mod lena apne bas mein है hi kahaan .....?

@ Manjeet जी ,Digambar जी shukariya .....!!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया ......!!

वाह बहुत सुंदर

mark rai said...

वहशी बादल जमकर बरसे फ़िर रात

सुई जुबां से लहू कुरेदती रही

सबा तो खामोश रही दोनों के बीच

बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....
........बहुत सुंदर ..

manu said...

harkeerat जी,

कहने को ६ छोटी छोटी क्षणिकाएं ही हैं....
२ minut पढने के...४ मिनट कमेन्ट देने के....
लेकिन १ घंटे से ब्लॉग पर हूँ....
और कुछ नहीं कह पा रहा...
तेरे नाम की लकीरों में

बो दिए हैं ....

अब तू ही बता ....

मैं ख्यालों को
किस
और मोडूं....

और,,,,,,,,



सबा तो खामोश रही दोनों के बीच

बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!

पढ़कर
हैरान सा हो गया....

योगेश स्वप्न said...

मोहब्बत खिलखिला के

हंसने ही वाली थी

कि गुज़र गई फ़िर

कुछ अर्थियाँ करीब से ....


wah wah wah bas wah wah wah.

sandeep sharma said...

बहुत ही खूबसूरत रचना है...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत खूब क्षणिकाये.

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......कितनी सुन्दर और सार्थक पंक्तियां.

शरद कोकास said...

इतने कम शब्दो मे इतनी बड़ी बड़ी परिभाशायें !!

Anamika said...

aap bahut gehra likhti hai

शोभना चौरे said...

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया .
ahsas bol uthe .
bahut sundar abhivykti

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...

अभी ख़ामोश हूँ लेकिन कभी आवाज़ मैं भी हूँ
जिस में बोलती हो तुम वही अंदाज़ मैं भी हूँ...

बहुत खुबसूरत लगा आपकी रचनाओं को पढ़ कर

सुलभ सतरंगी said...

"मैंने ज़िस्म में
जितने भी मुहब्बतों के बीज थे
तेरे नाम की लकीरों में
बो दिए हैं ....
अब तू ही बता ....
मैं ख्यालों को
किस ओर मोडूं .....!?!"

आपने चरम को छू लिया.

"मोहब्बत खिलखिला के
हंसने ही वाली थी
कि गुज़र गई फ़िर
कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!"

ये क्षणिकाएं नहीं
ऐसा लगता है मोहब्बत का समूचा जीवन चक्र एक हथेली पर आकर ठहर गया है.
क्या इसे भाग्य रेखा समझे जो कहता है "सब्र कर एक और दुनिया नसीब होगी तुम्हे..."

Devendra said...

हरकीरत जी ठीक कहा
आत्माओं को भला क्या खौफ!

Rohit Jain said...

Asaan Shabdo me itni gahri baatein, yaqeenan dil ko chhoo gai hain aur mujhe nahi lagta ki mujhe kuchh kahne ki jaroorat hai.......Shukriya itni behtar rachnaao ke liye.........

Apoorv said...

थोड़ा सा लेट सा हुआ आने मे..मगर इब्तिदा इतनी पुरअसर और दिलफ़िगार है कि नजरों को आगे धक्का देना पड़ा क्षणिकाओं पे जाने के लिये...
तलाक :
निःशब्द !! मगर चहरे की देहरी पे तलाक के लफ़्ज़ को चढ़ने की नौबत नही देनी चहिये..बल्कि लहू कुरेदती जुबां को खुद खुला दे देना चाहिये था..

कफ़न :
हसीं रूहों को कफ़न से क्या काम है समझ नही आया
पत्थर होते छाले:
छाले भले ही पत्थर हो गये हों वक्त के साथ..मगर वो पत्थर जरूर जख्म जैसे पिघल गये होंगे..इश्क के क़तरों की कुर्बत पा के..
गिला :
दरिया अगर कुछ तेज हो तो खयालों को भी साथ बहा ले जाता है..और ज़ख्मों को भी..

तू ही बता :
खयालों पे अगर अपना बस होता तब शायद हमारी मर्जी के मुताबिक मोड़ लेते..मगर कब हो पाता है ऐसा..
अर्थियाँ :
शायद टूटे हुए दिलों की अर्थियाँ रही होंगी...मुहब्बत तो लाज़वाल होती है..

हरकीरत ' हीर' said...

अपूर्व जी ,
शुक्रिया इब्तिदा के लिए ......!!
आपने पूछा है .....@कफ़न :हसीं रूहों को कफ़न से क्या काम है समझ नही आया .....

लाश और कफ़न का तो जन्मों- जन्मों का साथ है ....यहाँ मैं लाश हूँ ....और मेरा महबूब कफ़न ......जिसे कोई और हसीं चेहरा चुराए लिए जा रहा है ......!!

Murari Pareek said...

ग़ज़ब हर बार आप इतनी अच्छी पोस्ट लिखती हैं की दिल में सनसनी दौड़ जाती है !! लगता है जैसे एक सच्चाई हो !!! बहुत कशिश है "बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!"मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!!"वह जाते-जाते छू गया" "कि गुज़र गई फ़िर

कुछ अर्थियाँ करीब से" अंतिम लाइनों में तमा दर्द और निचोड़ कर भर देती हैं!!!

Sheena said...

Harkirat ji

Aapki likhi har ek shanikaa dil ko choo gayi.

bahut bahut tareef karna chahti hu par shabdo ki kami mehsoos ho rahi hai.. tareef ka koi bhi shabd aisa nahi jinmein aapko bayan ki ja sake

-Sheena

विनोद कुमार पांडेय said...

मैं कफ़न उतार के बैठी थी

कुछ हसीं रूहें .....

चुरा ले गई कफ़न मेरा

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से

मोहब्बत यतीम हो जाएगी


वाह कितनी सुंदर अभिव्यक्ति प्रेम की..
क्षणिकाएँ बहुत बढ़िया लगी...बढ़िया रचना...हरकिरत जी बहुत बहुत बधाई!!!

neha said...

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया ......!!

Bahut sunder...aap bahut aacha likhti haa

sada said...

तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से
मोहब्बत यतीम हो जाएगी ..!

बहुत ही सुन्‍दर भावों से सजी हर पंक्ति सभी क्षणिकाएं अनुपम ।

Prerna said...

kya baat hai..bahut khoob..sach mein man mohak panktiya

वन्दना अवस्थी दुबे said...

हरकीरत जी, एक बार पकडने के बाद अब शेर को छोडने का मन ही नहीं हो रहा...लेकिन जल्दी ही छोड दूंगी...हाहा...आप "किस्सा-कहानी" पर क्यों नहीं गईं?

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aapka lekhan vakai dilchasp he, alg andaaz aour behad doob jaane ko man kartaa he/
तुम यूँ न बिछड़ना मुझ से
मोहब्बत यतीम हो जाएगी ......!! kya baat he/ kafan utarna aour fir usaka chori ho jana..prem ke sandarbh me ek behatreen soch/
पत्थर होते छाले
...................................

मेरे इश्क़ के कतरे
पत्थरों पे गिरते रहे
रफ्ता -रफ्ता ....
दिल के छाले
पत्थर होते गए.....!!
in paanch lino ne fir prem ke us roop ko darshayaa he jo antatah patthar hojata he, yaani devata// meri soch he yah/
मोहब्बत खिलखिला के
हंसने ही वाली थी
कि गुज़र गई फ़िर
कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!
ynha ek alag tarah ka bhaav../ sach he harkiratji, aapki lekhani me ek alag kasak he/

अलीम आज़मी said...

aapke likhne ka jawaab hi nahi ....bahut sunder dhang har ek kavita ko pesh karti hai ...........bhadhai ho

kumar zahid said...

तू ही बता
.........................

मैंने ज़िस्म में

जितने भी मुहब्बतों के बीज थे

तेरे नाम की लाकीरों पे

बो दिए हैं ....

अब तू ही बता ....

मैं ख्यालों को

किस ओर मोडूं .....!?!


बहुत उमदा सवाल.
पर नाराज है क्या ? गरीबखाने की तरफ़ बिल्कुल तवज्जो नहीं है।

आशीष वशिष्ठ said...

हीर जी सुंदर रचनाओं के लिए बधई।

palaash ki talaash said...

kaafi gehare bhav hain inmein......
man ko ekanki si mil gayi....kuch bhav bhatak gaye the, sihar rahe the....ab simat rahe hain
shukriya

Pradeep Jilwane said...

छोटी-छोटी इन क्षणिकाओं में बड़ी ही शाइस्‍तगी और संभाल से शब्‍दों को रखा है. बहुत ही खूबसूरत है सभी कविताएं. मेरी बधाई स्‍वीकार करें.
विशेषकर इन पंक्तियों के लिए-
''सबा तो खामोश रही दोनों के बीच
बस तेरा चेहरा तलाक मांगता रहा .....!!''
- प्रदीप जिलवाने, खरगोन म.प्र.

अम्बरीश अम्बुज said...

गुज़र जाता अगर दरिया

चुपचाप.....

मैं ख्यालों को रख लेती

ज़ख्मों तले....

गिला तो इस बात का है ....

वह जाते-जाते छू गया ......!!

kuch kahne layak choda kahan ki comment kar paayein!!!

Jayant chaddha said...

sundar.... lekin dard deti....!!!

सुशील कुमार छौक्कर said...

एक से एक गहरी बेहतरीन क्षणिकायें। सुबह से कई बार पढ चुका हूँ आपकी इस पोस्ट को। आपकी लिखी रचनाओं को पढ़कर मेरा शब्दकोश बढ़ता जाता है। और काफी कुछ सीखने को भी मिल जाता है।

Mrs. Asha Joglekar said...

कमाल की क्षणिकाएं हैं । गिला और अर्थी तो जबरदस्त ।

श्याम कोरी 'उदय' said...

... एक साथ ढेरों चमचमाते तारे, ...सच कहूं कुछ पल को आंखें चौंधिया गई थीं, ... अंतिम रचना तो लाजबाव !!!!!

योगेन्द्र मौदगिल said...

v

अरे वाह... हक़ीर से हीर.... अच्छा लगा..

रंजना said...

LAJAWAAB...LAJAWAAB...MUGDH KAR LIYA AAPKI IN KSHANIKAON NE.....PRASHANSHA KO SHABD NAHI DHOONDH PAA RAHI....

सुलभ सतरंगी said...

हरकीरत जी,
आज दुबारा पढ़ा कुछ पंक्तियाँ फिर से टीस दे रही है.
अगली रचना का इंतिजार है.
कुछ मौसमी बारिश की दरकार है.

- सुलभ

RAJ SINH said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Prem Farrukhabadi said...

Lajawaab!!Badhai!!

ANAAM. JASWINDER (001-514-559-0335) said...

ਅੰਤਾਂ ਦਾ ਸ਼ਬਦ ਸੰਜਮ , ਥੋੜੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿੱਚ ਵਿਆਪਕ ਦ੍ਰਿਸ਼ ਸਾਕਾਰ ਕਰਨਾ ਤੁਹਾਡੀ ਵੱਡੀ ਖੂਬੀ ਹੈ ।

डॉ.ब्रजेश शर्मा said...

आपका ब्लॉग बेहद सूक्षम और संवेदनशील अनुभूतियों से बुनी हुयी नज्मों / कविताओं
का शानदार संग्रह है ! नज्मों में तो आपने कमाल ही किया है !
बहुत पसंद आया आपका रचना संसार ! हार्दिक बधाइयां !
आपने मेरी ग़ज़ल पर अपने कमेन्ट दिए , अच्छा लगा , आभार !
शुभकामनाएं , सादर.................

JHAROKHA said...

पत्थर होते छाले
...................................

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

और ......

रफ्ता -रफ्ता ....

दिल के छाले

पत्थर होते गए.....!!

बहुत बढ़िया हरकीरत जी----वसे तो आपकी सभी क्षणिकायें पसन्द आईं---पर यह क्षणिका तो दिल को छू गयी।
पूनम

creativekona said...

हरकीरत जी,
आपकी इस पोस्ट की हर क्षणिका अपने आप में मुकम्मल और बेहतरीन है----
हेमन्त कुमार

पंकज said...

अत्यंत खूबसूरत क्षणिकायें.

shyam1950 said...

nahi heer aap jo punjabi mein hain vah kuch aur hain
vahan sampreshneeyta aur sankshiptta ka anutha santulan hai jo sanket mein prem ki divayta ka srijan karta hai wo bat hindi kavita mein nahin aa pyee ... abhi AMRITA WALI KAVITA DEKH RAHA THA SACH KAHOON MAIN TO NAHI PAKAD PAYA... HO SAKTA HAI MERI NAZAR KAMJOR HO ...ABHI YE KSHNIKAYEIN DEKH RAHA HOON BAHUT SUNDAR BANI HAIN LEKIN HARKEERAT HEER KI JHALAK INMEIN NAHI MIL RAHI ya fir bahut halki upasthiti MERI IS AALOCHNA KO RADH KARNE KA POORA HAQ HAI APKO LEKIN ISE AADHAR BANA KAR MUJHSE DOSTI NA TODNA ...AAP AUR AAPKI KAVITA APNE GADHE RANGON KE BAVJOOD MUJHE BAHUT PRIY HAIN

SHIVLOK said...

Itni

Dard

Bharii

Abhivyakti

OH OH

Thodi

Rulaii

Aa

Rahi

Hai

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में
संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

साहिल said...

wakai behtareen kshanikayen hain... khaskar...

मेरे इश्क़ के कतरे

पत्थरों पे गिरते रहे

और रफ्ता -रफ्ता दिल के छाले

पत्थर होते गए.....!!

.............

गुज़र जाता अगर दरिया चुपचाप

मैं ख्यालों को रख लेती ज़ख्मों तले

गिला तो इस बात का है

वह जाते-जाते छू गया ......!!

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही भावुक कर देने वाली कुछ क्षणिकाएं है ..... सुन्दर चिंतन से लबरेज

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही भावुक कर देने वाली कुछ क्षणिकाएं है ..... सुन्दर चिंतन से लबरेज

Avinash Chandra said...

मोहब्बत खिलखिला के
हंसने ही वाली थी
कि गुज़र गई फ़िर
कुछ अर्थियाँ करीब से .....!!

mera maun tak stabdh hai yahaan