ग़ज़ल
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ले गया लूट कर दिल मेरा कौन है
दे गया ग़म नया, बेवफ़ा कौन है
जात क्या,उम्र क्या, क्या ग़लत क्या सही
इश्क़ में सब भला सोचता कौन है
टूटकर था कभी दिल ने' चाहा जिसे
चल दिए कह यही, तू मेरी कौन है ?
इक मुद्दत बाद देखा अभी आइना
पूछने है लगा, तू बता कौन है ?
कौन रह रह सदा,दे रहा रात भर
तू नहीं तो भला, कौन है कौन है
यूँ तो' ग़म के सिवा घर में' कोई नहीं
दास्ताँ सुन मे'री, रो रहा कौन है
आज भी 'हीर' तुझको न पाई भुला
इश्क़ के दर्द यूँ , भूलता कौन है
हीर ....
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ले गया लूट कर दिल मेरा कौन है
दे गया ग़म नया, बेवफ़ा कौन है
जात क्या,उम्र क्या, क्या ग़लत क्या सही
इश्क़ में सब भला सोचता कौन है
टूटकर था कभी दिल ने' चाहा जिसे
चल दिए कह यही, तू मेरी कौन है ?
इक मुद्दत बाद देखा अभी आइना
पूछने है लगा, तू बता कौन है ?
कौन रह रह सदा,दे रहा रात भर
तू नहीं तो भला, कौन है कौन है
यूँ तो' ग़म के सिवा घर में' कोई नहीं
दास्ताँ सुन मे'री, रो रहा कौन है
आज भी 'हीर' तुझको न पाई भुला
इश्क़ के दर्द यूँ , भूलता कौन है
हीर ....

